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नोटबंदी पर अरुण जेटली, 2014 से पहले बैंकों को लूटा गया था हमने उनका गला दबाया

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नोटबंदी पर अरुण जेटली, 2014 से पहले बैंकों को लूटा गया था हमने उनका गला दबाया
अरुण जेटली की फाइल फोटो
News18Hindi
Updated: December 7, 2018, 8:47 PM IST
केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने शुक्रवार को 'जागरण फोरम' कार्यक्रम में कहा कि नोटबंदी को लेकर जितनी नासमझ बहसें हैं..और अफवाहें हैं... वैसी किसी भी और कदम को लेकर मैंने आज तक नहीं देखी. जेटली ने कहा कि साल 2008 से लेकर 2014 तक देश के बैंकों को लूटा जा रहा था, हमारी सरकार ने नोटबंदी के जरिए उनका गला दबाया. वित्त मंत्री ने आगे कहा कि नोटबंदी के बाद एक झटके में जीएसटी का टैक्स बेस 6% तक बढ़ गया, लेकिन इसे समझने के लिए कोई तैयार नहीं है. जीडीपी के आंकड़े बदलने के सवाल पर उन्होंने कहा कि पहले भी छह बार ऐसा किया जाता रहा है.

जेटली ने कहा कि चीन के ग्रोथ रेट ने बीते 30 साल में दुनिया को सबसे ज्यादा प्रभावित किया. लगातार 9 प्रतिशत की दर से विकास लगातार 30 साल तक कोई आसान काम नहीं है. उन्होंने उम्मीद जताई कि भारतीय मध्यवर्ग की जनसंख्या अमेरिका के बराबर है और यही भारत की अर्थव्यवस्था के इंजन को गति देने में सबसे बड़े कारक साबित होंगे. उन्होंने कहा कि भारत के पास क्षमता है कि वो बाकी दुनिया के मुकाबले 5% अधिक तेजी से आगे बढ़ सके. पहले टैक्स न देने वाले को बुरी नज़र से नहीं देखा जा सकता था. 3.8 करोड़ लोग टैक्स देते थे और अब तक ये 6.8 हो गए हैं और सरकार के पांच साल पूरा होने तक ये 7.6 हो जाएगा. (ये भी पढ़ें-मोदी सरकार की पेंशन स्कीम: 1000 रु लगाकर मिलेंगे 2 लाख और जीवनभर 5000 रु पेंशन)

जेटली ने कहा कि हम 10 हज़ार किलोमीटर हाइवे हर साल बना रहे हैं. देश में 8 लाख करोड़ बीपीएल परिवार हैं हमने उनके लिए 50 लाख घर प्रतिवर्ष बनाए हैं. 7 लाख गावों में बिजली पहुंचाई है, 31 दिसंबर तक बिना बिजली कनेक्शन वाला एक भी घर देश में नहीं होगा. पहले रूरल सैनिटेशन 39% थी अब 96% हो गयी है. 31 मार्च तक हम उज्ज्वला योजना के तहत 8 करोड़ एलपीजी कनेक्शन दे चुके होंगे. अर्थव्यवस्था के मामले में हम बीते चार साल में 10 से 6 पर आ गए हैं और अगले साल इंग्लैंड को पीछे छोड़कर 5वें पर आ जाएंगे. हमारे एयरपोर्ट, रेलवे स्टेशन और पोर्ट अब ग्लोबल स्टैण्डर्ड के हो गए हैं. भारत इसी ग्रोथ रेट से अगले 20 साल तक बढ़ सकता है क्योंकि महिलाओं ने अभी-अभी इकॉनोमी में अपनी योगदान देना शुरू किया है.

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जाति-समूह आधारित राजनीति का वक़्त ख़त्म- जेटली ने कहा कि साल 1991 के बाद जितने भी नए राजनीतिक दल बने, उनमें एक बात सामान है कि कोई पार्लियामेंट्री बोर्ड नहीं हैं. एक परिवार उनका मालिक होता है और वो एक ख़ास समूह से संबंध रखता है. ये ख़ास परिवार एक ख़ास जाति या समूह की राजनीति और उसके विकास की ही बात करता है. अब इस बदलते हुए समाज में इस तरह कि राजनीति आखिर कब तक चल पाएगी? हर राज्य में एक परिवार द्वारा कंट्रोल की जाने वाली पार्टी है. ये अपनी ख़ास जनता को लेकर चिंतित रहते हैं और पाकिस्तान सीमा और कश्मीर में क्या हो रह है इसकी इन्हें कोई चिंता नहीं है.

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जेटली ने बताया कि स्पेशल स्टेटस की परिकल्पना नार्थ-ईस्ट और तीन पहाड़ी राज्यों को नज़र में रखकर की गई थी, अब हर संपन्न राज्य भी इसकी मांग करने लगा है. एक परंपरा है कि हर राज्य कहता है हमें ज्यादा चाहिए. जीएसटी लाना और उसे लागू करना केंद्र की जिम्मेदारी है, इससे जो मिलता है इसमें से 71% सीधा राज्यों को मिलता है. बाकी योजनाओं का भी मिला दें तो ये 82% तक हो जाता है इसलिए राज्यों का शिकायत करना बेमानी है. केंद्र जो भी योजनाएं लागू कर रहा है, सड़के बना रहा है वो सिर्फ 18% जो उसे मिलता है उसी से होता है.

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