साध्वी निरंजन ज्योति: कथावाचक से केंद्रीय मंत्री, अब बनेंगी महामण्डलेश्वर, ये है पूरी कहानी... - AcchiNews.com अच्छी न्यूज़ डॉट कॉम

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साध्वी निरंजन ज्योति: कथावाचक से केंद्रीय मंत्री, अब बनेंगी महामण्डलेश्वर, ये है पूरी कहानी...

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साध्वी निरंजन ज्योति आज निंरजनी अखाड़े की महामंडलेश्वर बनाई जायेंगीं. अभी वे केंद्रीय खाद्य प्रसंस्करण उद्योग राज्य मंत्री हैं. साध्वी निरंजन ज्योति मूलत: कथावाचक हैं. मूसा नगर, कानपुर देहात में साध्वी निरंजन ज्योति का आश्रम है. जब उनके पास 2014 के चुनावों के पास प्रधानमंत्री कार्यालय से फोन आया कि उन्हें केंद्रीय मंत्री बनाया जाना है, तब वे अपने इसी आश्रम में थीं और प्रवचन दे रही थीं.

सांसद चुने जाने के बाद हुई थीं हमले का शिकार
उमा भारती के बाद वे केंद्रीय मंत्री के पद तक पहुंचने वाली देश की दूसरी साध्वी हैं. 52 साल की निरंजन ज्योति 2014 में उत्तर प्रदेश की फतेहपुर सीट से जीतकर पहली बार सांसद बनी थीं. इससे पहले वे फतेहपुर से ही 2012 में उत्तर प्रदेश विधानसभा में विधायक चुनी गई थीं.

निरंजन ज्योति का जन्म उत्तर प्रदेश के हमीरपुर जिले के पटेवरा गांव में 1967 में हुआ है. उनके पिता अच्युतानंद और उनकी मां का नाम शिवकाली देवी है. वे निषाद समुदाय से आती हैं.

सांसद चुने जाने के बाद 14 जून, 2014 को उनपर एक प्राइवेट फंक्शन में हमला भी हुआ था. उस वक्त वे फतेहपुर जिले के सिविल लाइंस इलाके में एक पार्टी में थीं. उस वक्त उन्होंने इसका आरोप सपा कार्यकर्ताओं पर लगाया था. उन्होंने कहा था कि सपा के कार्यकर्ता उपचुनाव को प्रभावित करने के लिए उन्हें मारना चाहते हैं.

असंज्ञेय अपराध में दर्ज है मामला
लोकसभा चुनावों के वक्त दाखिल किए गए अपने शपथ पत्र में साध्वी निरंजन ज्योति ने अपने ऊपर एक असंज्ञेय अपराध का मामला दर्ज होने की बात कही थी. उनपर इस मामले में आपराधिक धमकी, इरादतन चोट पहुंचाना, व्याभिचार आदि के आरोप थे. हालांकि साध्वी ने इन सारे ही आरोपों को निराधार बताया था और कहा था कि, "ये सारे ही फर्जी मामले 19 मार्च को लोकसभा चुनावों के कैंडिडेट के तौर पर मेरा नाम घोषित किए जाने के बाद फतेहपुर पुलिस ने दर्ज किए थे. जबकि वे समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ता थे, जिन्होंने फतेहपुर में बीजेपी के कार्यालय पर हमला किया था. लेकिन पुलिस ने उनके खिलाफ केस दर्ज करने के बजाए, मेरे खिलाफ केस दर्ज कर दिया."

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मंत्रीपद को माना गया था राजनीतिक समीकरण साधने का प्रयास
निरंजन ज्योति निषाद समाज से आती हैं, जिसमें ज्यादातर केवट (नाव चालक) शामिल हैं. यह समुदाय उत्तर प्रदेश की ज्यादातर नदियों के किनारों पर बसा हुआ है. और यहां के वोटबैंक में इसका बड़ा हिस्सा है. वे इस सरकार में यूपी से आने वाले संतोष गंगवार (बरेली से एमपी) और उमा भारती (झांसी से एमपी) के साथ पिछड़े समुदाय से आने वाली तीसरी केंद्रीय मंत्री हैं.

जब साध्वी निरंजन ज्योति को मंत्री पद मिला तो राजनीतिक विश्लेषकों का मानना था कि यूपी के पिछड़े समुदाय से आने वाले नेताओं को केंद्रीय मंत्रिमंडल में तवज्जो इसलिए दी गई ताकि पार्टी को 2017 के चुनावों में पिछड़े वर्ग के नेता की कमी न खले. ऐसा इसलिए भी जरूरी था क्योंकि कल्याण सिंह को राजस्थान का गवर्नर बना कर भेजा जा चुका था, ऐसे में पिछड़े समुदाय से आने वाला कोई बड़ा नेता राज्य में नहीं बचा था. कल्याण सिंह ही तब तक बीजेपी की ओर से उत्तर प्रदेश में पिछड़े समुदाय के बड़े नेता माने जाते थे.

साध्वी के चलते पीएम ने भी मांगी थी माफी
दिल्ली की एक चुनावी सभा को संबोधित करते हुए साध्वी निरंजन ज्योति ने अपनी पार्टी के लोगों और विपक्षियों के लिए 'रामजादा' और 'हरामजादा' शब्दों का इस्तेमाल किया था. इसके बाद संसद में उनका भारी विरोध हुआ था. जिसके बाद उन्होंने संसद के दोनों सदनो में माफी मांग ली थी. हालांकि इस मुद्दे पर पीएम मोदी ने भी साध्वी की भाषा को गलत बताया था और माफी मांगी थी.

सभी 13 अखाड़ों की उपस्थिति में बनाई जाएंगी महामण्डलेश्वर
निरंजनी अखाड़े के श्री महंत और अखिल भारतीय अखाड़े के अध्यक्ष महंत नरेन्द्र गिरी ने बताया कि निरंजन ज्योति साध्वी पहले हैं और केन्द्रीय मंत्री बाद में. साध्वी निरंजन ज्योति निरंजनी अखाड़े के महामंडलेश्वर परमानंद गिरी की शिष्या भी हैं, उन्हें सोमवार को निरंजनी अखाड़े के आचार्य महामंडलेश्वर बालकानंद गिरी की मौजूदगी में महामंडलेश्वर की पदवी दी जाएगी.

अब तक निरंजनी अखाड़े में संतोषी गिरि, संतोषानंद सरस्वती, मां अमृतामयी, योग शक्ति सहित 15 महिला महामंडलेश्वर बन चुकी हैं. सुबह 11 बजे कुंभ मेले क्षेत्र में निरंजनी अखाड़े की छावनी में सभी 13 अखाड़ों के आचार्य महामंडलेश्वर की मौजूदगी में साध्वी निरंजन ज्योति का पट्टाभिषेक किया जायेगा.

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