'कछुए' को 'खरगोश' बनाता है ये कोच, फिर भी आईपीएल में क्‍यों नहीं मिलता मौका? - AcchiNews.com अच्छी न्यूज़ डॉट कॉम

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'कछुए' को 'खरगोश' बनाता है ये कोच, फिर भी आईपीएल में क्‍यों नहीं मिलता मौका?

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विदर्भ ने सौराष्‍ट्र को हराकर रणजी ट्रॉफी 2018-19 का खिताब अपने नाम कर लिया है. इसके साथ ही उसने लगातार दूसरी बार भारतीय क्रिकेट के सबसे प्रतिष्ठित टूर्नामेंट में अपना दम दिखाया है. इस जीत के नायकों की बात की जाए तो वसीम जाफर (1037 रन, 11 मैच), कप्‍तान फज़ल फैज़ल (752 रन, 11 मैच), अक्षय वादकर (725 रन, 11 मैच), आदिय सरवटे ( 55 विकेट, 11 मैच) और अक्षय वाघरे (34 विकेट, 10 मैच) हैं, लेकिन इन सभी ने अपना सर्वश्रेष्‍ठ प्रदर्शन उस शख्‍स की देखरेख में किया है जिसे भारतीय क्रिकेट सर्किट में 'खडूस' कोच के नाम से जाना जाता है.

जी हां, हम बात कर रहे हैं एक ऐसे शख्‍स की जो खिलाड़ी और कोच के रूप में आठ बार रणजी ट्रॉफी चैंपियन टीम का हिस्‍सा बना है. अगर चार बार उनकी टीम फाइनल में ना चूकी होती तो उनके नाम 12 खिताब दर्ज होते. हम यहां बात कर रहे हैं चंद्रकांत पंडित की जो कि मौजूदा वक्‍त में विदर्भ टीम के कोच हैं. मजेदार बात है कि रणजी में यह टीम करीब छह दशक (61 साल) से खेल रही है, लेकिन उसे घरेलू क्रिकेट में अपना दबदबा साबित करने का मौका पिछले दो सीजन में हासिल हुआ है, जिसमें कोच के तौर पर पंडित का योगदान सर्वोच्‍च है.

बतौर खिलाड़ी पंडित...
57 वर्षीय पंडित ने बतौर प्‍लयेर रणजी ट्रॉफी में मुंबई, मध्‍यम प्रदेश और आसाम का प्रतिनिधित्‍व किया है. उन्‍होंने 138 फर्स्‍ट क्‍लास मैचों में 48.57 के औसत से 22 शतक की मदद से 8209 रन बनाए हैं, जिसमें 202 रन की सर्वोच्‍च पारी है. भारत के लिए पांच टेस्‍ट और 36 वनडे खेलने वाले पंडित बतौर खिलाड़ी दो बार (1983-84, 1984-85) रणजी चैंपियन मुंबई रणजी ट्रॉफी का हिस्‍सा रहे हैं. जबकि उनके रहते मुंबई दो बार (1982-83, 1990-91) रनर-अप रही है. यही नहीं, इसके अलावा चंद्रकांत पंडित 1998-99 में उस मध्‍य प्रदेश रणजी टीम का हिस्‍सा रहे हैं, जो कि रनर-अप रही थी.

रणजी चैंपियन विदर्भ टीम

इस कारण जबर्दस्‍त कोच हैं पंडित
कोच के रूप में चंद्रकांत पंडित का सफर बेहद दिलचस्‍प रहा है. मुंबई को लगातार दो बार (2002-03 और 2003-04) चैंपियन बनवाने के बाद वह बतौर कोच अपनी कामयाबी को बरकरार नहीं रख सके और एमसीए से उनका रिश्‍ता टूट गया.

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इसके बाद 2011-12 में वह राजस्‍थान के साथ जुड़े जिसे उस वक्‍त रणजी ट्रॉफी की सबसे कमजोर टीम माना जाता था, लेकिन इसी साल राजस्‍थान के चैंपियन बनने से उनका भारतीय क्रिकेट में ओहदा बढ़ गया. एक बार फिर वह मुंबई लौट आए और अपनी घरेलू टीम को 2015-16 में रणजी ट्रॉफी चैंपियन बनाया, लेकिन यकायक उन्‍हें मुंबई क्रिकेट एसोसिएशन ने हटा दिया. यह वो वक्‍त था जब पंडित के सामने अपने जीवन की संभवत: सबसे कठिन चुनौती थी. लेकिन उन्‍होंने हार नहीं मानी और करीब छह दशक से रणजी में औपचारिकता निभा रही विदर्भ टीम के साथ कोच के रूप में जुड़ने की पेशकश मान ली.

जब 2017-18 में विदर्भ टीम चैंपियन बनी तो पंडित के आलोचकों ने इसे तुक्‍का करार दे दिया, लेकिन उन्‍होंने 2018-19 का खिताब जीतकर अपनी क्षमता को फिर साबित किया है. यही नहीं, वह कोच के रूप में ऐसी रणनीति बनाते हैं कि रिजल्‍ट उनकी टीम के पक्ष में ही आता है. विदर्भ टीम के लिए उन्‍होंने कई खिलाड़ी बाहर से बुलाए जिसमें सबसे बड़ा नाम वसीम जाफर का है. सबसे मजेदार बात ये है कि कोच और कप्‍तान के रूप में पंडित व जाफर की जोड़ी ने मुंबई के लिए अच्‍छे रिजल्‍ट दिए थे. जबकि इस बार के खिताबी मुकाबले में टीम इंडिया के चैंपियन खिलाड़ी चेतेश्‍वर पुजारा को बड़ा स्‍कोर बनाने से रोकने के लिए पंडित ने ही जाल बिछाया था, जिसमें वो कामयाब रहे.

क्‍या आईपीएल में मिलेगा मौका?
चंद्रकांत पंडित मास्‍टर ब्‍लास्‍टर सचिन तेंदुलकर के गुरु रमाकांत आचरेकर के चेले हैं और उनकी क्रिकेट में यह बात बखूबी झलकती है. छह बार बतौर कोच और दो बार बतौर खिलाड़ी रणजी ट्रॉफी खिताब का हिस्‍सा बनने वाले पंडित को लेकर तब ज्‍यादा हैरानी होती है जब ऐसे अनुभवी कोच को आईपीएल में कोई टीम अपने साथ नहीं जोड़ना चाहती. एक बार फिर देश में आईपीएल का शोर सुनाई दे रहा है और सवाल वही है कि क्‍या इस बार कोई टीम रणजी के इस सफल कोच पर दांव खेलना चाहेगी.