सदियों से इस अनोखी परम्परा को निभाते चले आ रहे हैं यहां के लोग, आखिर क्या है वजह... - AcchiNews.com अच्छी न्यूज़ डॉट कॉम

AcchiNews.Com अच्छी न्यूज़ डॉट कॉम is Hindi Motivational Inspirational quotes site here you can find all positive khabar in hindi.

Earn Money

सदियों से इस अनोखी परम्परा को निभाते चले आ रहे हैं यहां के लोग, आखिर क्या है वजह...

Mi सेल लगी मात्र 1 रुपये में कई प्रोडक्ट आपके हो सकते हैं अभी अप्लाई करो www.saleoffer.online Or पाइये paytm 1000 रुपये रिचार्ज आफर http://bit.ly/2EG1SuE
हमारे देश में हर राज्य में अलग-अलग परंपराएं निभाई जाती हैं. इन्हीं में से एक परंपरा निभाई जाती है हिमाचल प्रदेश के एक गांव में जो बुरी शक्तियों के प्रभाव को कम करने के लिए निभाई जाती है. दरअसल, किन्नौरी जिले के पूह खंड के रोपा गांव इस परंपरा का कई सदियों से निभाया जा रहा है. ये परंपरा है तीरंदाजी की. यहां तीरंदाजी पर्व हर साल मनाया जाता है. इस साल बीते सोमवार को इस पर्व का समापन हो गया. रोपावासियों की ऐसी मान्यता है कि देवी दुर्गा मां माघ महीने के दूसरे पखवाड़े तक स्वर्ग प्रवास पर रहती हैं.
रोपा के रहने वाले लोग बताते हैं कि दुर्गा माता के स्वर्ग भ्रमण के साथ ही गांव में तीरंदाजी खेल पर्व शुरू होता है. मां दुर्गा के स्वर्ग वापसी के साथ ही इस खेल का समापन होता है. ऐसी मान्यता है कि मां दुर्गा के स्वर्ग भ्रमण पर जाते ही उनकी गैर मौजूदगी मेें बुरी शक्तियों को नष्ट करने के लिए रोपा गांव में तीरंदाजी खेल का आयोजन किया जाता है.
खेल में प्रत्येक परिवार से एक पुरुष का भाग लेना अनिवार्य होता है, जो परिवार इस खेल में भाग नहीं लेता है उसे जुर्माना देना पड़ता है. ये खेल दो दलों के बीच होता है. एक-एक मुखिया चुना जाता है. तीर चलाने का लक्ष्य दो दिशाओं, पूर्व और पश्चिम की तरफ होता है तथा लक्ष्य की दूरी लगभग 100 फुट या इससे भी अधिक होती है. लक्ष्य यानि लकड़ी का तख्ता चार इंच वर्गाकार का होता है.
पूर्व के लक्ष्य को डायन का और पश्चिम के लक्ष्य को राक्षस का प्रतीक माना जाता है. खिलाड़ियों को बारी-बारी से दोनों तरफ से लक्ष्य को भेदना होता है. प्रतिभागी एक बारी में केवल तीन तीर का ही प्रयोग कर सकता है. खेल की शुरुआत प्रतिदिन डायन को लक्ष्य मानकर की जाती है. दोनों दलों के अर्जित अंकों के आधार पर ही जीत और हार का निर्णय किया जाता है. वहीं शाम को हर चीज भुलाकर सभी को दावत दी जाती है सात ही नृत्य का भी आयोजन होता है.