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NRC मुद्दे को भूलकर बीजेपी के साथ गठबंधन से AGP नेताओं में असंतोष

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NRC मुद्दे को भूलकर बीजेपी के साथ गठबंधन से AGP नेताओं में असंतोष
(तस्वीर- ट्विटर)
News18Hindi
Updated: March 14, 2019, 1:30 AM IST
तूलिका देवी, गुवाहाटी.

नागरिकता (संशोधन) विधेयक के मुद्दे पर दो महीने पहले बीजेपी से अपने संबंध समाप्त करने के बाद असम गण परिषद (एजीपी) अब भगवा दल के साथ मिलकर लोकसभा चुनाव लड़ेगी. असम गण परिषद (एजीपी) और भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के इस फैसले के तत्काल बाद एजीपी नेता लचित बरदोलोई और हेमेन बोराह ने अपनी पार्टी से इस्तीफा दे दिया. उन्होंने इस गठबंधन को अवसरवादी गठबंधन बताया.

उन्होंने अपने इस फैसले को सोशल मीडिया पर साझा करते हुए लिखा, 'शुक्रिया एजीपी के अवसरवादी नेताओं. आपने अपने क्षेत्रीय पार्टी होने के मुखौटे को उतार दिया. आपको हमारे 855 शहीदों के बारे में बातें नहीं करनी चाहिए. अब दिल से एजीपी का सफाया कर रहे हैं. अब यह सही समय है जब सभी क्षेत्रवादियों को इकट्ठा हो जाना चाहिए.'


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इसी के साथ ही एजीपी के विधिक सलाहकार हेमेन बोराह ने भी अपने पद से इस्तीफा दे दिया है.

असम में बीजेपी और एजीपी गठबंधन के आधिकारिक फैसले के कुछ घंटे बाद ही असम गण परिषद में विरोध के स्वर उठने लगे हैं. न्यूज18 से बात करते हुए महंत ने कहा, 'मैं बीजेपी के साथ गठबंधन के खिलाफ हूं. असम समझौते के कार्यान्वयन का समर्थन करता हूं और नागरिकता (संशोधन) विधेयक 2016 का विरोध कर रहा हूं.'

महंत ने कहा, 'एजीपी का एक खेमा यह आरोप लगा रहा है ​कि मैं निजी महत्वाकांक्षा की वजह से इस गठबंधन का विरोध कर रहा हूं. लेकिन, ऐसा नहीं है.' इसके साथ ही उन्होंने पार्टी को ऐसे निर्णय लेने के लिए दोषी ठहराया है. उन्होंने कहा, 'मुझे गठंधन के मामले पर अंधेरे में रखा गया था. इससे पहले वर्ष 2016 में भी पार्टी के वरिष्ठ सहयोगियों ने बीजेपी के साथ गठबंधन किया था, लेकिन उस समय भी मुझे नहीं बताया गया था. सीट बंटवारे पर भी मुझसे चर्चा नहीं की गई थी. उन्होंने ऐसा कभी नहीं सोचा कि मेरे लिए भी यह जानना महत्वपूर्ण है.'

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ऐसा लगता है कि लोकसभा चुनाव 2019 न केवल गैर-मुस्लिम शरणार्थियों के भाग्य का फैसला करेगा बल्कि उन नेताओं के भाग्य का भी फैसला करने वाला होगा जिनकी पूरी सियासत उस मुद्दे के आसपास घूमती है जिसका पिछले तीन दशकों से समाधान नहीं किया जा रहा है.

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