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बुर्के पर लगाई गई रोक पर क्या कहते हैं इस्लामिक विद्वान

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श्रीलंका में इस्टर के दिन हुए सीरियल आतंकी हमलों के बाद वहां की सरकार ने कड़ा रुख अख्तियार करते हुए बुर्का और चेहरों को ढकने वाले कपड़ों पर पाबंदी लगाने का आदेश जारी कर दिया है. श्रीलंका में धमाकों की जिम्मेदारी आईएस ने ली थी, जिसके बाद सरकार ने ये आदेश जारी किया है.

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किन देशों में है बुर्के पर पाबंदी
श्रीलंका में बुर्के पर रोक के पहले चाड, कैमरुन, गाबून, मराकश, ऑस्ट्रेलिया, बल्गारिया, डेनमार्क, फ्रांस बेल्जियम और चीन के मुस्लिम बहुल इलाके शिंजयांग में भी बुर्के पर रोक लगी हुई है. सीरियल आतंकी हमलों के बाद श्रीलंका भी इन देशों की सूची में शामिल हो गया है.

राष्ट्रपति का संदेश
श्रीलंका के राष्ट्रपति ने लिखा – “ऐसे कपड़ों को पहनना जो पूरी तरह से चेहरों को ढकते हों, सोमवार से उन पर पबंदी लगा दी गई है.” इसके कुछ दिन पहले ही श्रीलंका की संसद ने भी सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए बुर्का पर पाबंदी लगाने के एक प्रस्ताव को मंजूरी दी है.

रोक पर बहस जारी

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श्रीलंका में बुर्का पर पाबंदी लगाने के बाद अब एक बार फिर दुनिया भर में बुर्का को लेकर बहस शुरू हो गई है. ये सवाल किया जाने लगा है कि क्या सिर्फ सिर का ढाकना ही काफी है या चेहरे पर नकाब डालना भी जरूरी है.

लखनऊ ऐशबाग ईदगाह के इमाम, मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के सदस्य और सुन्नी धार्मिक नेता मौलाना ख़लिद रशीद फिरंगी महल्ली ने न्यूज़ 18 से बात करते हुए कहा कि इस्लाम में परदे का हुक्म है. परदे का मतलब है कि आपका पूरा शरीर कायदे से ढका हुआ हो और ये बुर्का पहन कर भी हो सकता है और चादर ओढ कर भी हो सकता है.

क्या कहता है कुर्आन
मौलाना फिरंगी महल्ली की दलील है कि कुर्आन में अल्लाह ने पैगम्बर मोहम्मद को संबोधित करते हुए फरमाया है- “अपनी बीबियों, बेटियों और मुसलमानों की औरतों से कह दो कि अपने ऊपर चादर लटका लिया करें. इससे बहुत जल्द उनकी पहचान हो जाएगी और फिर वे सतायी नहीं जाएंगी.”

मौलाना ने कहा कि परदा शरीअत का एक अहम हिस्सा है. श्रीलंका में बुर्का पर पाबंदी को लेकर मौलाना का कहना है कि मजहबी आजादी का हक हर एक को हासिल है और इसमें मुसलमान भी शामिल हैं. उन्होंने श्रीलंका सरकार की ओर संकेत करते हुए कहा कि वहां आतंकी हमले का मतलब ये नहीं है कि इसकी वजह से पूरी कौम को आप संदेह में ले लें. इसका हरगिज ये मतलब नहीं है कि आप शरीअत पर हमला करने लगें. मौलाना ने मांग की कि श्रीलंका सरकार अपने फैसले पर फिर से विचार करते हुए बुर्के पर लगाई पाबंदी वापस ले.

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जिस्म ढकना जरूरी
दूसरी ओर नौजवान अहले हदीस आलिमे दीन और मरकज अबुल कलाम आजाद इस्लामिक अवेकनिंग सेंटर, नई दिल्ली के प्रमुख मौलाना मोहम्मद रहमानी कहते हैं कि इस्लाम में असल परदा तो पूरे जिस्म का है, जिसमें चेहरा भी शामिल है. मौलान ने कहा कि परदा से मतलब कोई खास कपड़ा जैसे बुर्का वगैरह ही नहीं बल्कि हर वो कपड़ा है जो ढीला ढाला हो, और जिससे औरत का पूरा जिस्म ढका रहे.

उन्होंने कहा कि जहां तक सुरक्षा जांच का मसला है, ऐसी सूरत में सरकारों को लेडिज सुरक्षा गार्ड रखने चाहिए. उनकी संख्या ज्यादा से ज्यादा बढ़ाई जानी चाहिए, ताकि निर्धारित जगहों या फिर पोलिंग बूथ जैसे स्थानों पर महिलाओं को दिक्कत न हो. उनका ये भी कहना है कि मुस्लिम महिलाओं को भी इस तरह की सुरक्षा जांच में पूरी मदद करनी चाहिए. मौलाना ने ये भी कहा कि परदे का मामला सिर्फ मुस्लिम महिलाओं तक ही सीमित नहीं है. बल्कि कई ऐसी गैर मुस्लमान महिलाएं भी हैं जो अपना चेहरा दिखाना नहीं चाहती हैं और घूंघट ओढकर पर्दे में रहना चाहती हैं. ऐसी महिलाओं के बारे में भी सरकारों को सोचना चाहिए और महिला सुरक्षा गार्डों का प्रयोग किया जाना चाहिए. उन्होंने भी आतंकी हमलों के बाद बुर्के पर पाबंदी को गलत बताया और कहा कि इससे मसला हल होने वाला नहीं है.

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