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पांच साल के कामकाज के आधार पर सुनहरे भविष्य का सपना दिखा रही बीजेपी

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बीजेपी ने लोकसभा चुनाव-2019 के लिए अपना संकल्प पत्र पेश कर दिया है. संकल्प पत्र में अगले पांच वर्ष की योजनाओं के साथ ही यह भी बताया गया है कि 2047 में आजादी के 100 साल पूरे होने तक देश कैसे आगे बढेगा. घोषणापत्र में किसानों और ग्रामीण भारत पर जोर है ही, मध्य वर्ग और युवाओं की चिंता भी की गई है. बीजेपी को पहले बनियों की पार्टी के तौर पर जाना जाता था। लेकिन 1980 से 2019 के चुनाव आते-आते बीजेपी ने खुद को पूरे देश की पार्टी बना लिया है. अब पार्टी समाज के सभी वर्गों की बात करती है. हालांकि, इस बार बीजेपी अपने शुरुआती वोट बैंक बनियों की चिंता भी करती दिखी है. संकल्प पत्र में राष्ट्रीय व्यापारीकल्याण बोर्ड के गठन की बात की गई है.

 

बीजेपी मुख्यालय में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मौजूदगी में संकल्प पत्र जारी करते समय इस पर खास जोर दिया गया कि जानबूझकर इसे घोषणा पत्र के बजाय संकल्प पत्र नाम दिया गया है. बीजेपी अध्यक्ष अमितशाह ने दावा किया कि इसमें लिखी गई बातें पूरी की जाएंगी. संकल्प पत्र पर बात करते समय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कांग्रेस और उसके घोषणापत्र पर भी प्रहार किया. उन्होंने कहा कि आजादी के बाद से लगातार नाकाम साबित होते रहे लोग भविष्य का रास्ता नहीं दिखा सकते। दरअसल बीजेपी कांग्रेस की न्याय स्कीम को महज चुनावी स्टंट करार देते हुए मतदाताओं को समझाने की कोशिश कर रही है कि कांग्रेस और उसके नेता1947 से अब तक गरीबी हटाओ का राग अलाप रहे हैं. कांग्रेस ने कई चुनाव इसी स्लोगन से जीत भी लिये, लेकिन गरीबी खत्म करने और गरीबों के कल्याण की दिशा में सिर्फ मोदी सरकार ने काम किया.

 


बीजेपी के संकल्प पत्र में कश्मीर से 35ए और अनुच्छेद-370 खत्म करना, समान नागरिक संहिता लागू करना, अयोध्या में राम मंदिर निर्माण और राष्ट्रीय सुरक्षा से कोई समझौता नहीं जैसे दशकों पुराने मुद्दे बने हुए हैं. बीजेपी अनुच्छेद-370 खत्म नहीं कर पाने और समान नागरिक संहिता लागू नहीं करने के लिए राज्यसभा में अपनी कम संख्या की दलील देती है. अमित शाह समेत तमाम बीजेपी नेता कह रहे हैं कि राज्यसभा मेंसमीकरण अनुकूल होते ही पार्टी इन मुद्दों पर तेजी से आगे बढ़ेगी.


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पीएम नरेंद्र मोदी और अमित शाह (फ़ाइल फोटो)

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राम मंदिर निर्माण पर जानबूझकर ध्यान नहीं दे रही बीजेपी
राम मंदिर को लेकर मामला सुप्रीम कोर्ट की ओर से गठित समिति के पास है, जो आम सहमति से समझौते की तलाश कर रही है. सुब्रह्मण्यम स्वामी समेत कई नेता अयोध्या में अधिग्रहण वाली भूमि पर राम मंदिर बनानेकी दलील देते रहे हैं. इस पर पार्टी और सरकार ने जानबूझकर ध्यान नहीं दिया क्योंकि मामला सुप्रीम कोर्ट में अंतिम पड़ाव में है. ऐसे में पार्टी एक और दीवानी मुकदमे में नहीं पड़ना चाहती. मुस्लिम संगठन ये कहकरअदालत का दरवाजा खटखटा सकते हैं कि अधिगृहित जमीन लोककल्याण के बजाय किसी एक पक्ष को राम मंदिर के निर्माण के लिए कैसे दी जा सकती है.

 

संकल्प पत्र के तीन-चार वादे कर सकते हैं आकर्षित
सवाल उठता है कि आखिर बीजेपी के संकल्प पत्र में ऐसा क्या खास है, जो आम मतदाता को अपने साथ जोड़ सके. घोषणापत्र के तीन-चार वादे जरूर लोगों को आकर्षित कर सकते हैं. पहला वादा ग्रामीण भारत के मतदाताओंको किसान क्रेडिट कार्ड के तहत एक लाख रुपये के कर्ज पर पांच साल तक कोई ब्याज नहीं लेने का है. वहीं देश के हर किसान को सिंचाई की सुविधा मुहैया कराने की बात की गई है. यही नहीं कृषि क्षेत्र में 25 लाख करोड़रुपये के निवेश का वादा भी किया गया है. ये वादे ऐसे हैं, जिससे आम आदमी, खास तौर पर किसान प्रभावित हो सकता है.

 

मुफ्तखोरी के बजाय किसानों को मजबूत करने की है बात
बीजेपी और मोदी की सोच है कि अगर मुफ्तखोरी की कोई योजना पेश की जाती, तो पार्टी पर घबराकर कांग्रेस की न्याय योजना जैसी स्कीम पेश करने का आरोप लगता. ऐसी योजनाओं से अर्थव्यवस्था पर बोझ भी बढेगा. वहीं इसके लिए रकम मुहैया करना आसान नहीं होगा. इसकी जगह खेती के लिए संसाधन और सस्ता फंड मुहैया कराकर किसानों को अपने पैरों पर खडा कर मजबूत किया जा सकता है. इसी योजना के तहत2022 तक किसानों की आय दोगुनी करने की बात की गई है. ग्रामीण भारत के अलावा आधारभूत सुविधाओं के विकास पर भी जोर है. देश में ऑपरेशनल एयरपोर्ट की संख्या दोगुनी करने के साथ ही सड़कों का जाल गहराकरने की बात है. कुल मिलाकर 100 लाख करोड़ रुपये का निवेश आधारभूत सुविधाओं के विकास पर करने का संकल्प है. शिक्षा और डिजिटल इंडिया पर जोर के साथ राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करने की बात भी है.

50 पन्ने के संकल्प पत्र में मोदी की 6 तस्वीर
एक बात साफ है कि बीजेपी मोदी को केंद्र में रखकर चुनाव लड़ने जा रही है. इसका संकेत संकल्प पत्र में भी साफ दिखता है. पचास पन्नों के संकल्प पत्र के कवर पेज पर तो मोदी हैं ही, अंदर भी उनकी पांच तस्वीरें लगी हैं.बीजेपी अध्यक्ष के नाते अंदर के पन्नों पर एक तस्वीर अमित शाह की है, तो दूसरी तस्वीर संकल्प पत्र निर्माण समिति की अध्यक्षता कर रहे राजनाथ सिंह की है. बैक कवर पर श्याम प्रसाद मुखर्जी, दीनदयाल उपाध्याय औरअटल बिहारी वाजपेयी की तस्वीर है. जाहिर है इन तस्वीरों के सहारे बीजेपी राष्ट्रवाद, अंत्योदय और गुड गवर्नेंस की अपनी मूल थीम को मजबूती देने में लगी है.

 

भविष्य के सपने भी दिखा रहा है संकल्प पत्र
गांव, गरीब, किसान, नौजवान की बात करने वाले संकल्प पत्र का लक्ष्य भविष्य के सपने दिखाना भी है, जिसका इशारा खुद पीएम मोदी ने किया. इसका खाका भी है कि आजादी के शताब्दी वर्ष में भारत कहां पहुंचेगा. जो भीसरकार आएगी, उसका कार्यकाल सामान्य हालात में 2024 में पूरा होगा, लेकिन बीजेपी ने संकल्प पत्र में 2022 का बड़ा लक्ष्य रखा है. 2022 में आजादी के 75 वर्ष पूरे हो रहे हैं. इस मौके के लिए 75 संकल्प हैं, जो पूरे कियेजाने हैं.

 

क्या 2019 में भी 2014 जैसा भरोसा जताएंगे लोग
संकल्प पत्र में सपने हैं और लोगों की अपेक्षाओं को पूरा करने का वादा भी। यह बताने की कोशिश भी है कि पिछले पांच साल में वो काम हुए, जो 50 साल में नहीं हो पाए. साथ ही बताया गया है कि लोगों के सपनों औरअपेक्षाओं को बीजेपी और मोदी की अगुवाई वाली सरकार ही पूरा कर सकती है. बीजेपी मोदी के चेहरे के जरिये इसी संदेश को संकल्प पत्र के जरिये तमाम मतदाताओं तक पहुंचाने में लगी है. सवाल यही है कि क्यामतदाता 2019 में भी मोदी पर वैसा ही भरोसा करने वाले हैं, जैसा 2014 में किया था.