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क्या इस शहर के क्रिकेटर्स के साथ होता है वर्ल्ड कप में अन्याय, नहीं मिलती टीम में जगह?

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चयनकर्ता गुंटूर का, खिलाड़ी बाहर हुआ हैदराबाद का. दोनों शहर कुछ समय पहले तक आंध्र प्रदेश में आते थे. हैदराबादी खिलाड़ी ने तंज कसा. एक और हैदराबादी खिलाड़ी ने बताया कि इस शहर के खिलाड़ियों के साथ अन्याय पहले भी हुआ है. आखिर ये सब भारतीय क्रिकेट में क्या हो रहा है? क्या वाकई चीफ सेलेक्टर एमएसके प्रसाद, जो गुंटूर के हैं, उन्होंने हैदराबादी अंबाति रायडू के साथ अन्याय किया है? और क्या दूसरे हैदराबादी खिलाड़ी प्रज्ञान ओझा ने आरोप लगाया, वो सही है कि हैदराबादी खिलाड़ियों के साथ पहले भी ऐसा होता रहा है?

वर्ल्ड कप टीम की घोषणा के बाद सबसे ज्यादा चर्चा जिस खिलाड़ी को लेकर हुई, वो रिषभ पंत हैं. हालांकि यह बात सही है कि ज्यादा चर्चा अंबाति रायडू की होनी चाहिए. उसकी वजह यह है कि उनके पास वर्ल्ड कप का अनुभव है और भारतीय टीम में लगातार उन्हें मौका मिलता रहा है. उनकी जगह विजय शंकर को लिया जाना ज्यादातर लोगों को सही फैसला भले ही लगा हो, लेकिन चौंकाने वाला जरूर था.

अंबाति रायडू भी चौंके और उन्होंने तंज कसता हुआ एक ट्वीट कर दिया. इसके बाद प्रज्ञान ओझा ने एक ट्वीट किया. उन्होंने जो लिखा, उसका भावार्थ यह है कि कई हैदराबादी क्रिकेटर्स के साथ ऐसा हुआ है. इसमें एक वो भी हैं. इस ट्वीट के बाद दो सवाल उठते हैं. पहला, क्या वाकई हैदराबादी क्रिकेटर्स के साथ अन्याय होता रहा है? दूसरा, क्या प्रज्ञान ओझा के साथ अन्याय हुआ था?


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पहले सवाल के बारे में पहले चर्चा कर लेते हैं. रायडू के बारे में काफी बात हो चुकी है. इसलिए उनके सेलेक्शन को छोड़ देते हैं. बस, इतना जान लीजिए कि उनके ट्वीट का मतलब क्या था. दरअसल, चीफ सेलेक्टर एमएसके प्रसाद ने कहा था कि विजय शंकर को उन पर इसलिए तरजीह दी गई है, क्योंकि वो थ्री डाइमेंशनल (3डी) खिलाड़ी हैं. प्रसाद का मतलब बैटिंग, बॉलिंग और फील्डिंग तीनों में पारंगत होने से था. इसी पर रायडू ने तंज कसा.

कभी तेंदुलकर से होती थी इस खिलाड़ी की तुलना, फिर भी नहीं खेला वर्ल्डकप का कोई मैच

रायडू से पहले जिस बड़े हैदराबादी खिलाड़ी का नाम सामने आता है, वो वीवीएस लक्ष्मण हैं. लक्ष्मण का 2003 में वर्ल्ड कप खेलना तय माना जा रहा था. लेकिन अचानक दिनेश मोंगिया का नाम आ गया. उस समय भी कुछ इसी तरह का तर्क दिया गया था. मोंगिया के बारे में कहा गया कि वो गेंदबाजी कर लेते हैं, साथ ही उनकी फील्डिंग अच्छी है. लक्ष्मण के लिए कहा गया कि उनकी रनिंग को लेकर भी समस्या है. वो स्लो रनर हैं. तब लक्ष्मण बेहद निराश और नाराज हुए थे. उस वक्त ऐसा कहने वालों की संख्या भी कम नहीं थी कि मोंगिया को कप्तान सौरव गांगुली की वजह से लिया गया.

अब बात, दूसरे सवाल यानी प्रज्ञान ओझा की. ओझा ने आखिरी टेस्ट 2013 और आखिरी वनडे 2012 में खेला. 2008 और 2009 में उनका करियर शुरू हुआ. यानी उनका इशारा 2011 के वर्ल्ड कप की तरफ है. वर्ल्ड कप विजेता 2011 की टीम देखें, तो उसमें प्रज्ञान ओझा की जगह बनती नजर नहीं आएगी. 2013 में वेस्टइंडीज के खिलाफ सीरीज में उनके एक्शन को संदिग्ध पाया गया. एक्शन सुधारने के बाद से वो लगातार घरेलू क्रिकेट ही खेल रहे हैं. यानी जिस हैदराबादी क्रिकेटर के साथ अन्याय हुआ, वो सिर्फ वीवीएस लक्ष्मण ही नजर आते हैं.

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