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विजय शंकर ने बताया अपने 'दुश्मन' का नाम!

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हरफनमौला खिलाड़ी विजय शंकर ने अपने सामने नंबर 4 बल्लेबाजी क्रम को लेकर बहस को उठते हुए देखा है. कई पूर्व क्रिकेटर और क्रिकेट पंडित मानते हैं कि इस क्रम के लिए युवा खिलाड़ी ऋषभ पंत और अनुभवी अंबाती रायडू अच्छे विकल्प होते, लेकिन पांच सदस्यों की चयन समिति ने इन दोनों को नकारते हुए वर्ल्ड कप के लिए शंकर को मौका दिया है.

इस पारी से पूरे देश में बन गए थे विलेन
अगर देखा जाए तो शंकर का विवादों से पुराना नाता रहा है. इतिहास बताता है कि शंकर और विवाद साथ-साथ चलते हैं. इस देश में कोई भी निदास ट्रॉफी के उस फाइनल को नहीं भूला होगा जहां शंकर अहम समय पर रन न बनाने के कारण विलेन बन गए थे. शंकर ने 19 गेंदों में 17 रन बनाए थे. हालांकि दिनेश कार्तिक की बदौलत भारत ने वह मैच जीत लिया था, लेकिन शंकर के सामने बार-बार उस पारी का भूत आकर खड़ा हो जाता. लेकिन काले बादलों के बाद धूप निखर कर सामने आती है और यही शंकर के साथ हुआ.

विजय शंकर (PC - BCCI)


फाइनल में पहली बार मिला था बल्लेबाजी का मौका
शंकर ने आईएएनएस से बात करते हुए कहा कि उस वाकये ने उन्हें जीवन का अहम पाठ पढ़ाया और एक मजबूत इंसान बनाया जो समझ सका कि मौजूदा पल का लुत्फ कैसे उठाया जाता है और क्रिकेट के मैदान पर ज्यादा दबाव नहीं लेना चाहिए. उन्होंने कहा कि कई लोगों को यह तक नहीं पता कि वह उस फाइनल मैच में पहली बार भारतीय टीम की तरफ से बल्लेबाजी करने उतरे थे.

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सोशल मीडिया मेरे लिए बन गया दुश्मन
उन्होंने कहा, "मैं निश्चित तौर पर कहूंगा कि निदास ट्रॉफी एक क्रिकेटर के तौर पर मेरे लिए जीवन बदलने वाला पल था. उस बात को तकरीबन एक साल हो चुका है और हर कोई जानता है कि क्या हुआ था और वह कितना मुश्किल था. मैंने तकरीबन 50 फोन कॉल लिए थे. मीडिया के लोग मुझसे फोन कर रहे थे और वही सवाल पूछ रहे थे. यहां तक की सोशल मीडिया मेरे लिए मुसीबत बन गया था. मैं थोड़ा निराश हो गया था और उससे बाहर निकलने में मुझे समय लगा."
विजय शंकर (PC - BCCI)

एक मैच ने बदल दिया जीवन
उन्होंने कहा, "दूसरी तरफ इन सभी चीजों ने मुझे सिखाया कि इस तरह की स्थिति को कैसे संभालना है और किस तरह से बाहर आना है. उस वाकये ने मुझे बताया कि एक दिन खराब होने का मतलब यह नहीं है कि विश्व का अंत हो गया. यह सिर्फ मेरे साथ नहीं हुआ, यह बीते सालों में कई शीर्ष खिलाड़ियों के साथ हुआ है."

मुझे देना है 100%
शंकर के मुताबिक, "सबसे अच्छी बात यहा थी कि बल्ले के साथ वो मेरा पहला अनुभव था. मैंने उस सीरीज में गेंदबाजी तो की थी लेकिन फाइनल मैच में मैं पहली बार बल्लेबाजी करने उतरा था. वो हालांकि जीवन की सीख देने वाला पल था. उसने मुझे सिखाया कि हर पल का लुत्फ कैसे उठाते हैं और इस तरह के वाकये अस्थायी होते हैं. साथ ही मुझे सिखाया कि मुझे अपना 100 फीसदी देना चाहिए."

नंबर 4 को लेकर जारी विवाद पर वापस आते हुए शंकर ने कहा कि वह सीख गए हैं कि दबाव मुक्त कैसे हुआ जाता है और अब उन्हें फर्क नहीं पड़ता कि कोई क्या कह रहा है. न्यूजीलैंड में जब मैंने नंबर 3 पर बल्लेबाजी की तो मेरा प्रदर्शन अच्छा रहा. सबसे अच्छी बात यह रही कि टीम प्रबंधन ने मुझ पर भरोसा दिखाया और माना कि मैं यह काम कर सकता हूं. इससे आपको अतिरिक्त प्ररेणा मिलती है. टीम की जरूरत मेरी प्राथमिकता है और मैं हर स्थिति में खेलने को तैयार हूं."

शंकर से जब पूछा गया कि सीनियर खिलाड़ियों और मुख्य कोच रवि शास्त्री से उन्हें क्या फीडबैक मिला? इस पर उन्होंने कहा कि वह इस बारे में ज्यादा बता नहीं सकते. उन्होंने कहा कि वह देखकर सीखने वाले हैं और जब भी अपने सीनियर खिलाड़ियों के साथ रहते हैं तो ज्यादा से ज्यादा सीखने की कोशिश करते हैं.

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