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Narsingh Jayanti 2019 : नृसिंह जंयती शुभ मुहूर्त ,पूजा विधि , महत्व , कथा और मंत्र

Narsingh jayanti 2019 : नृसिंह जयंती 2019 में 17 मई 2019 में यानी आज के दिन है। शास्त्रों की माने तो वैशाख शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी के दिन नृसिंह जयंती (Narsingh jayanti) का पर्व पूरे भारत वर्ष में बड़े धूमधाम से मनाया जाता है।भगवान नरसिंह के स्वरुप की बात करें तो उनका शरीर नर के रूप में और सिर सिंह के रूप में है। भगवान नृसिंह की पूजा -अर्चना करने से न केवल धनलाभ और सुख -समृद्धि आती है बल्कि नृसिंह पूजा से शत्रुओं का भी नाश होता है। जो भी भगवान नृसिंह की सच्चे मन से आराधना करता है । भगवान उसकी भक्त प्रहलाद की तरह ही प्रत्येक परिस्थिति में रक्षा करते हैं। अगर आप भी भगवान नृसिंह की उपासना करने चाहते हैं तो और आप यह नहीं जानते की कब है नृसिंह जंयती ,क्या है इसका शुभ मुहूर्त (Subh Mahurat) क्या है इसका महत्व (Mahatva) , पूजा विधि (Puja Vidhi) कथा (Katha) और मंत्र (Mantra) तो आज हम आपको इन सब के बारे में बताएंगे। तो चलिए जानते है नृसिंह जयंती की इन सभी बातों के बारे में.....


नृसिहं जयंती शुभ मुहूर्त (Narsingh Jayanti Ki Tithi or Subh Mahurat)

नृसिहं जयंती शुभ मुहूर्त- सुबह 6 बजकर 4 मिनट से (16 मई 2019)

अगले दिन सुबह 4 बजकर 10 मिनट तक (17 मई 2019)

पारायण का समय (Parayan Ka Samay)

18 मई 2019

सुबह 5 बजकर 33 मिनट


नृसिंह जंयती का महत्व (Narsingh Jayanti ka Mahatva/Importance)

शास्त्रों के अनुसार नरसिंह जयंती का व्रत एक ऐसा व्रत है जिसके करने मात्र से ब्रह्महत्या का दोष भी मिट जाता है। नरसिंह जयंती व्रत रखने से सांसारिक सुख, भोग और मोक्ष तीनों की प्राप्ति करता है।साथ ही जो मनुष्य नृसिंह चतुर्दशी का व्रत करता है वह निश्चित सात जन्मों के पापों से मुक्त होकर अपार धन-संपत्ति का मालिक होता है।

इसके अलावा जो कोई भक्ति भाव से इस पापमोचक व्रत का विधि पूर्वक सुनता है, उसके सभी सौख्य और मनोरथ पूरे होते हैं। नरसिंह चतुर्दशी के दिन मध्याह्न काल में जो मनुष्य यथाशक्ति इस व्रत का अनुष्ठान करता और लीलावती देवी के साथ हरीत मुनि और भगवान नृसिंह (नरसिंह) का पूजन करता है उसे सनातन मोक्ष की प्राप्ति होती है। इतना ही नहीं वह श्रीनृसिंह भगवान आशीर्वाद से सदा मनोवांछित वस्तुओं को प्राप्त करता रहता है।

इसके अतिरिक्त हारीत और लीलावती के साथ भगवान के बालरूप का ध्यान करके रात्रि में पूजन करता है, वह नर से नारायण हो जाता है। इस व्रत के प्रभाव से सभी शत्रुओं पर विजय की प्राप्ति होती है। भगवान नरसिंह को समर्पित जयंती के व्रत का पारण अगले दिन सूर्योदय के पश्चात् तब किया जाता है। जब चतुर्दशी तिथि समाप्त हो जाती है। परन्तु अगर यदि चतुर्दशी तिथि सूरज उगने से पूर्व ही समाप्त हो जाती है। तो आप सभी कार्यों को सम्पूर्ण करके व्रत का पारण सूर्योदय से पूर्व भी कर सकते है।

नृसिंह जंयती पूजा विधि (Narsingh Jayanti Puja Vidhi)

1.भगवान नृसिंह की पूजा संध्याकाल में ही की जाती है। भगवान नृसिंह की मूर्ति के साथ माता लक्ष्मी की प्रतिमा भी अवश्य स्थापित करें।

2.भगवान नृसिंह की पूजा में फल , पुष्प , कुमकुम , केसर , पंचमेवा, नारियल , अक्षत और पितांबर अवश्य भी सम्मिलित करें।

3.भगवान नृसिंह को चंदन , कपूर , रोली और तुलसी अवश्य चढ़ांए।

4.पूजा करते समय भगवान नृसिंह की कथा और मंत्रों का जाप अवश्य करें।

5.पूजा के बाद किसी निर्धन या किसी ब्राह्मण को श्रद्धा के अनुसार दान अवश्य करें।


नृसिंह जंयती की कथा (Narsingh Jayanti ki Katha)

एक बार हिरण्यकशिपु नाम के राक्षस ने ब्रह्मा जी और और भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए कठिन तपस्या की। भगवान शिव तथा ब्रह्मा जी ने उसकी इस तपस्या से प्रसन्न होकर उसे वरदान मांगने को कहा। हिरण्यकशिपु ने उनसे अजेय होने का वरदान माँगा। ब्रह्मा जी और और भगवान शिव ने उसकी यह मनोकामना पूर्ण की।

व्रत पाने के बाद हिरण्यकशिपु में अहंकार आ गया कि अब उसे कोई नहीं मार सकता। इसलिए वह अहंकारवश वह प्रजा पर अत्याचार करने लगा और उन्हें तरह-तरह के यातनाएं और कष्ट देने लगा। इन्ही दिनों में हिरण्यकशिपु को अपनी पत्नी से एक पुत्र की प्राप्ति हुई। जिसका नाम प्रहलाद रखा गया। चाहे प्रहलाद का जन्म राक्षस कुल में हुआ था। परन्तु फिर भी प्रहलाद को भगवान विष्णु की भक्ति से गहरा लगाव था।

हिरण्यकशिपु को प्रहलाद द्वारा विष्णु जी की भक्ति करना पसंद नहीं था। इसलिए उसने प्रहलाद को भगवान विष्णु की भक्ति करने से रोकने के लिए अनेक असफल प्रयास किये| एक बार उसने अपनी बहन होलिका की सहायता से उसे अग्नि में जलाने के प्रयास किया, परन्तु भगवान विष्णु ने अपने भक्त प्रहलाद के प्राणों को कोई हानि न होने दी।


भगवान नृसिंह के मंत्र (Narsingh Mantra)

1.ॐ नृम मलोल नरसिंहाय पूरय-पूरय

2.ॐ क्रोध नरसिंहाय नृम नम:

3.ॐ नृम नरसिंहाय शत्रुबल विदीर्नाय नमः

4.ॐ करन्ज नरसिंहाय यशो रक्ष



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