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पूर्व ISRO चीफ बोले- 2012 में ही रवाना होना था चंद्रयान-2

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पूर्व ISRO चीफ बोले- 2012 में ही रवाना होना था चंद्रयान-2, UPA ने ‘राजनीतिक कारणों’ आगे बढ़ा दी योजना
इसरो के पूर्व प्रमुख जी माधवन नायर (फाइल फोटो)
News18Hindi
Updated: June 14, 2019, 8:55 AM IST
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के पूर्व प्रमुख जी माधवन नायर ने दावा किया कि चंद्रयान-2 मिशन पहले ही रवाना किया जा सकता था पर तत्कालीन UPA सरकार ने 2014 के लोकसभा चुनावों को देखते हुये ‘राजनीतिक कारणों’ से ‘मंगलयान’ परियोजना को आगे बढ़ा दिया.

चंद्रयान-1 के अगुवा रहे नायर के प्रमुख और अंतरिक्ष विभाग में 2003 से 2009 तक सचिव के पद पर रहे थे और चंद्रयान-1, 22 अक्टूबर, 2008 में छोड़ा गया था. उन्होंने कहा कि चंद्रयान-2 को 2012 के अंत में रवाना किया जाना था. नायर बीते साल अक्ट्रबर में भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो गये थे.

वहीं कांग्रेस ने चंद्रयान-2 मिशन में संप्रग सरकार के देर करने से जुड़े पूर्व इसरो प्रमुख  के दावे की निंदा की है. पार्टी प्रवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने नायर के बयान के पर कहा, ‘मैंने यह बयान नहीं देखा है, लेकिन ऐसा है तो मैं इसकी निंदा करता हूं.

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सिंघवी ने कहा, ‘आपका काम सरकार की आलोचना करना नहीं है. आप वैज्ञानिक हैं, आपका स्थान तो गौरवान्वित करने वाला है. आप देखते हैं कि एक पार्टी सत्ता से बाहर है तो कुछ बोलने लगते हैं. कल को कांग्रेस सत्ता में आई तो इसकी धुन गाने लगेंगे.'

चांद पर कहां जाएगा और कैसे काम करेगा यह मिशन?

 इसरो के चेयरमैन के सिवान ने बताया था कि हम चांद पर एक ऐसी जगह जा रहे हैं, जो अभी तक दुनिया से अछूती रही है. यह है चंद्रमा का दक्षिणी ध्रुव. वहीं अंतरिक्ष विभाग की ओर से जारी एक बयान में कहा गया था कि इस मिशन के दौरान ऑर्बिटर और लैंडर आपस में जुड़े हुए होंगे.

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इन्हें इसी तरह से GSLV MK III लॉन्च व्हीकल के अंदर लगाया जाएगा. रोवर को लैंडर के अंदर रखा जाएगा. लॉन्च के बाद पृथ्वी की कक्षा से निकलकर यह रॉकेट चांद की कक्षा में पहुंचेगा. इसके बाद धीरे-धीरे लैंडर, ऑर्बिटर से अलग हो जाएगा.

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