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तिलक को इसलिए कहा जाता है भारतीय राष्ट्रवाद का पिता

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पुण्‍यतिथि विशेष: तिलक को क्यों कहा जाता है भारतीय राष्ट्रवाद का पिता, जानिए उनकी कहानी
लोकमान्य तिलक
News18Hindi
Updated: August 1, 2019, 9:53 AM IST
एक राष्ट्रवादी, शिक्षक, समाज सुधारक, वकील और एक स्वतंत्रता सेनानी, ये सभी बाल गंगाधर तिलक की पहचान है. ये भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के पहले लोकप्रिय नेता हुए. ब्रिटिश ऑफिसर उन्हें 'भारतीय अशान्ति के पिता' कहते थे. वो 'लोकमान्य' के नाम से मशहूर हुए, जिसका अर्थ होता है ऐसा नेता जो सभी तबकों में मान्य हो. तिलक का जन्म 23 जुलाई 1856 को ब्रिटिश भारत में वर्तमान महाराष्ट्र के रत्नागिरी जिले के एक गांव चिखली में हुआ था.

'स्वराज यह मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है'
तिलक ब्रिटिश राज के दौरान स्वराज के सबसे पहले और मजबूत अधिवक्ताओं में से एक थे. उनका मराठी भाषा में दिया गया नारा 'स्वराज्य हा माझा जन्मसिद्ध हक्क आहे आणि तो मी मिळवणारच' पूरे देश में "स्वराज यह मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है और मैं इसे लेकर ही रहूंगा" के तौर पर काफी लोकप्रिय हुआ. उन्होंने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के कई नेताओं के साथ मिलकर आजादी की लड़ाई लड़ी, जिनमें बिपिन चन्द्र पाल, लाला लाजपत राय, अरविन्द घोष, वीओ चिदम्बरम पिल्लै और मुहम्मद अली जिन्नाह शामिल थे.

लोकमान्य तिलक


लाल-बाल-पाल
बाल गंगाधर तिलक भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस से 1890 में जुड़े थे. लाला लाजपत राय, बाल गंगाधर तिलक और विपिन चंद्र पाल को एक साथ लाल-बाल-पाल के नाम से जाना जाता था. भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में 1905 से 1918 तक की अवधि में वे गरम राष्ट्रवादी विचारों के पक्षधर और प्रतीक बने रहे. वे स्वदेशी के पक्षधर थे, सभी आयातित वस्तुओं के बहिष्कार के लिए उन्होंने आंदोलन किया. 1905 के बंग-भंग आंदोलन में उन्होने जमकर भाग लिया. लाल-बाल-पाल की त्रिमूर्ति ने पूरे भारत में बंगाल के विभाजन के विरुद्ध लोगों को आंदोलित किया. उनके इस आंदोलन की वजह से बंगाल में शुरू हुआ धरना, प्रदर्शन, हड़ताल, और विदेशी वस्तुओं का बहिष्कार देश के अन्य भागों में भी फैल गया.

जब मांडले की जेल में कैद हुए थे तिलक
1905 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस गरम दल और नरम दल में बंट गया. 1908 में तिलक ने क्रांतिकारी प्रफुल्ल चाकी और खुदीराम बोस के बम हमले का समर्थन किया. इस समर्थन की वजह से उन्हें बर्मा के मांडले की जेल में बंद कर दिया गया. बाल गंगाधर तिलक की गिरफ्तारी, विपिन चन्द्र पाल और अरविन्द घोष की सक्रिय राजनीति से सन्यास लेने की वजह से भारतीय स्वतंत्रता का ये उग्र राष्ट्रवादी आंदोलन कमजोर पड़ गया. 1928 में लाला लाजपत राय की भी अंग्रेजों के लाठीचार्ज की वजह से मृत्यु हो गई. इस तरह भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में 'लाल-बाल-पाल' टर्म का संयुक्त इस्तेमाल खत्म हो गया.

लोकमान्य तिलक टर्मिनल

आल इंडिया होम रूल लीग
बाल गंगाधर तिलक ने एनी बेसेंट और मोहम्मद अली जिन्ना की मदद से होम रूल लीग की स्थापना की. इस आंदोलन का स्वरूप सत्याग्रह आन्दोलन जैसा नहीं था. इसमें चार से पांच लोगों की टुकड़ियां बनाई जाती थीं, जिसका मकसद पूरे भारत की जनता में जाकर होम रूल लीग का मतलब समझाना होता था. एनी बेसेंट जो कि आयरलैंड से भारत आई हुई थीं. उन्होंने वहां पर होमरूल लीग जैसा प्रयोग देखा था और उसी तरह का प्रयोग उन्होंने भारत में करने का सोचा.

बाल गंगाधर तिलक का निधन
कम उम्र में शादी करने के व्यक्तिगत रूप से विरोधी होने के बावजूद तिलक 1891 एज ऑफ़ कंसेन्ट विधेयक के खिलाफ थे, क्योंकि वे उसे हिन्दू धर्म में अतिक्रमण और एक खतरनाक उदाहरण के रूप में देख रहे थे. अपने राष्ट्रवादी आंदोलनों की वजह से बाल गंगाधर तिलक को भारतीय राष्ट्रवाद के पिता के रूप में जाना जाता है. 1 अगस्त, 1920 को उनका निधन हो गया.

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