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जानें कौन हैं यह महिला, जिन्हें गूगल कर रहा है सलाम

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Muthulakshmi Reddi/मुथुलक्ष्मी रेड्डी: भारत की पहली महिला विधायक और डॉ. के जन्मदिन पर गूगल ने बनाया डूडल, जानें ख़ास बातें
भारत की पहली महिला विधायक और गायनोकोलॉजिस्ट डॉ. मुथुलक्ष्मी रेड्डी के जन्मदिन पर गूगल ने बनाया डूडल, जानिए उनसे जुड़ी दिलचस्प बातें
News18Hindi
Updated: July 30, 2019, 8:41 AM IST
Google Created Doodle On 133rd Birthday Of Muthulakshmi Reddi: सर्च इंजन गूगल ने भारत की पहली महिला विधायक डॉ. मुथुलक्ष्मी रेड्डी के 133वें जन्मदिन के अवसर पर डूडल बनाया है. मुथुलक्ष्मी का जन्म 30 जुलाई 1886 को मद्रास के पुडुकोता रियासत में हुआ था. उनके शुरूआती जीवन और शिक्षा दीक्षा में उन्हें कई मुश्किलों का सामना करना पड़ा. वो देश की पहली ऐसी लड़की थीं जिन्होंने बॉयज स्कूल में एडमिशन लिया था. वह देश की पहली महिला विधायक और डॉक्टर भी थीं. आजीवन उन्होंने महिला अधिकारों और स्वतंत्रता आन्दोलन के लिए लड़ाई लड़ी. आइए जानते हैं उनके जीवन से जुड़ी रोचक बातें.

डॉ. मुथुलक्ष्मी रेड्डी अपने पूरे रियासत में शिक्षा पाने वाली पहली छात्रा थीं. हालांकि परिवार में केवल पिता ही उनकी उच्च शिक्षा के पक्ष में थे. मां तो जल्द से जल्द शादी कराना चाहती थीं. एक वक्त ऐसा भी आया कि युवावस्था में उन्हें अपना स्कूल छोड़ना पड़ा. घर में ही ट्यूशन टीचर से ही वो पढ़ा करतीं. स्कूल खत्म होने के बाद उनके पिता भी मां की प्रबाव में रेड्डी की शादी कराना चाहते थे.पर रेड्डी ने विरोध किया. विरोध का सबब ऐसा रहा कि उन्होंने मेडिकल की परीक्षा दी और उनको 'मद्रास मेडिकल कॉलेज' में दाखिला मिल गया. पिता एस नारायण स्वामी चेन्नई के महाराजा कॉलेज के प्रिंसिपल थे और बेटी देश की पहली महिला हाउस सर्जन बनी.

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कॉलेज में पढ़ाई के दौरान ही उनकी मुलाकात सरोजिनी नायडू से हुई. यहीं से उनके अंदर महिलाओं और समाज के अन्य पिछड़े तबके के लोगों के लिए काम करने की इच्छा जगी. यह इच्छा और प्रबल तब हो गई जब रेड्डी की मुलाकात एनी बेसेंट और महात्मा गांधी से हुई. उनके विचारों से प्रभावित होकर वह समाज सुधारक के रूप में काम करने लगीं.

अपनी उच्च शिक्षा के लिए रेड्डी इंग्लैंड भी गईं. लेकिन मद्रास विधान परिषद में प्रवेश करने के लिए उन्हें मेडिकल प्रैक्टिस छोड़नी पड़ी. वह कांग्रेस 'वीमेन इंडिया असोशिएन' की उपाअध्यक्ष बनीं. बाद में शक्ति हरी हरन द्वारा नोमिनेट होकर बतौर देश की पहली महिला विधायक उन्होंने मद्रास विधानसभा में कदम रखा. साल 1930 में गांधी के साथ विरोध प्रदर्शनों में शामिल होने के लिए उन्होंने अपने पद से इस्ती भी दे दिया.

अपनी किताब 'माय एक्सपीरियंस एस ए लेजिस्लेटर ' में उन्होंने बतौर महिला विधायक अपने अनुभव साझा किए हैं. भारत सरकार ने साल 1956 में उन्हें पद्म भूषण से नवाजा था.

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