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मोदी सरकार के 100 दिन: PM-किसान, पेंशन स्कीम और केसीसी से बदलेगी जिंदगी!

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मोदी सरकार 2.0 के सौ दिन (100 days of modi 2.0) पूरे हो चुके हैं. सरकार ने 2022 तक किसानों की आय दोगुनी करने का लक्ष्य रखा है. इसलिए दूसरे कार्यकाल के सौ दिन में सरकार का पूरा फोकस किसानों (Farmers) पर रहा है. ताकि कृषि और किसान दोनों आगे बढ़ें. चाहे वह कृषि के लिए रिकॉर्ड बजट (agriculture budget) बढ़ाने की बात हो या फिर उनके लिए पेंशन स्कीम शुरू करने और सम्मान निधि का विस्तार हो. कैबिनेट की पहली ही बैठक में करोड़ों किसानों को पेंशन (Pradhan Mantri Kisan Pension Yojana) की कवरेज देने का फैसला हुआ. सौ दिन के अंदर इसे लागू भी कर दिया गया. दूसरी ओर पीएम-किसान निधि स्कीम (Pradhan Mantri Kisan Samman Nidhi) के दरवाजे सभी किसानों के लिए खोल दिए गए.

नरेंद्र मोदी सरकार (narendra modi government) ने 2022 तक किसानों की आय दोगुनी करने का लक्ष्य रखा है. बीजेपी प्रवक्ता राजीव जेटली का कहना है कि इसे पूरा करने के लिए सरकार दिन-रात काम कर रही है. ताकि खेती-किसानी घाटे का सौदा न रहे. पीएम मोदी ने सौ दिन के भीतर ही मुख्यमंत्रियों की हाई पावर कमेटी गठित की,  जो कृषि क्षेत्र में व्यापक सुधार और किसानों की आमदनी बढ़ाने के लिए काम करेगी. मुख्यमंत्रियों और अधिकारियों वाली यह कमेटी 2 महीने में अपनी रिपोर्ट देगी. महाराष्ट्र के सीएम देवेंद्र फडणवीस इसके कन्वीनर हैं. कर्नाटक, हरियाणा, अरुणाचल प्रदेश, गुजरात, एमपी, यूपी के सीएम और केंद्रीय कृषि मंत्री इसके सदस्य हैं.

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कृषि क्षेत्र में व्यापक सुधार के लिए हाईपावर कमेटी गठित

मानधन योजना यानी किसान पेंशन स्कीम

बीजेपी ने 2019 के लोकसभा चुनाव में किसानों को पेंशन देने का वादा किया था. सरकार बनते ही इसे निभा भी दिया. पहली कैबिनेट बैठक में ही पीएम नरेंद्र मोदी ने किसानों के लिए पेंशन स्कीम पर मुहर लगा दी. इसका रजिस्ट्रेशन जारी है. इसके जरिए तीन साल में पांच करोड़ छोटे और सीमांत किसान लाभांवित होंगे. सरकार तीन वर्ष में अपने अंशदान के रूप में 10774.50 करोड़ रुपये की राशि खर्च करेगी. इसके तहत 60 वर्ष की उम्र होने पर 3000 रुपये पेंशन देने का प्रावधान है. ताकि किसी किसान को बुजुर्ग होने पर किसी के सामने हाथ न फैलाना पड़े. आजादी के 70 साल बाद तक किसानों को इस तरह की सुविधा देने के बारे में कभी विचार तक नहीं किया गया था. किसान प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (पीएम-किसान) योजना से प्राप्त लाभ से सीधे ही इस योजना में अपना मासिक अंशदान करने का विकल्प चुन सकता है.

किसान सम्मान निधि का विस्तार

बीजेपी ने लोकसभा चुनाव में वादा किया था कि यदि दोबारा उसकी सरकार आई तो प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि स्कीम का विस्तार किया जाएगा. पहले इसके तहत सिर्फ 12 करोड़ लघु एवं सीमांत किसान ही कवर थे, जिनकी पास पांच एकड़ तक खेती है. लेकिन सरकार बनने के बाद सभी 14.5 करोड़ किसानों के लिए इसे लागू कर दिया गया. इसके तहत किसानों को सालाना छह-छह हजार रुपये दिए जा रहे हैं. वर्ष 2019-20 में केंद्र सरकार इस स्कीम पर 87,217.50 करोड़ रुपये खर्च करेगी. आजादी के बाद पहली बार सीधे किसानों के बैंक खातों में इतनी बड़ी रकम भेजी जा रही है.

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अब सभी किसानों को मिलेगा इस योजना का लाभ

रिकॉर्ड बजट

केंद्र सरकार चाहती है कि किसान समृद्ध हों, वो कर्ज पर निर्भर न रहें. इसके लिए बड़ा बजट भी खर्च करना पड़ेगा. इसलिए कृषि बजट में पिछले साल के मुकाबले रिकॉर्ड 140 फीसदी की बढ़ोत्तरी की गई. इतनी वृद्धि देश के इतिहास में पहली बार हुई. वर्ष 2019-20 में खेती-किसानी के लिए कृषि मंत्रालय को 1,30,485 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया गया है.

सिर्फ 15 दिन में केसीसी बनाने का आदेश

मोदी सरकार ने किसानों को साहूकारों के चंगुल से बचाने के लिए अभियान शुरू किया है. इसके लिए फोकस किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) पर है, ताकि किसान किसी व्यक्ति की बजाय बैंकों से सबसे सस्ती दर पर पैसा लेकर खेती-किसानी को आगे बढ़ा सकें. इसके लिए सरकार ने बैंकों को सख्त निर्देश दिए हैं कि आवेदन के 15वें दिन तक यानी दो सप्ताह के अंदर ही केसीसी बन जाए. यही नहीं बैंकों को निर्देश भी दिया है कि वो किसान क्रेडिट कार्ड बनवाने के लिए गांव-गांव में कैंप लगाएं. वहीं पर किसानों से आवेदन लें. देश में अभी मुश्किल से 7 करोड़ किसानों के पास ही किसान क्रेडिट कार्ड है, जबकि किसान परिवार 14.5 करोड़ हैं.

 14 फसलों की एमएसपी बढ़ाई

मोदी सरकार 2.0 ने सौ दिन के अंदर ही 14 खरीफ फसलों की एमएसपी (न्यूनतम समर्थन मूल्य) भी बढ़ा दिया है. इनमें धान, कपास, अरहर दाल, तिल, उड़द दाल, सूरजमुखी और सोयाबीन शामिल हैं. सोयाबीन की कीमत में 311 रुपये प्रति क्विंटल, सूरजमुखी में 262 रुपए, तिल की कीमत में 236, तूर दाल में 125 रुपए, कपास में 105 रुपये, उड़द दाल में 100 रुपए और धान की एमएसपी में 65 रुपये प्रति क्विंटल की वृद्धि की गई.

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सिर्फ दो सप्ताह में केसीसी देने का आदेश

बंजर भूमि को उर्वरा बनाने का संकल्प

बजर होती धरती पूरी दुनिया में खेती-किसानी के लिए बड़ा संकट है. क्योंकि उपजाऊ धरती ही नहीं रहेगी तो फिर फसलें कहां पैदा होंगी. भारत की भी करीब 30 फीसदी जमीन बंजर हो चुकी है. इसकी वजह से न सिर्फ कृषि पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है बल्कि इस क्षेत्र में रोजगार की संभावना भी कम हो रही है. इसलिए मोदी सरकार ने अपने सौ दिन के कार्यकाल में ही यह लक्ष्य तय लिया कि अगले 10 साल में 50 लाख हेक्टेयर बंजर जमीन को उपजाऊ बनाया जाएगा. इससे लगभग 75 लाख लोगों को रोजगार भी मिलेगा. इस काम के लिए भारत पूरी दुनिया को लीड करेगा. 13 सितंबर तक ग्रेटर नोएडा में दुनिया भर के कृषि वैज्ञानिक इस मसले पर मंथन करेंगे.

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