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जानें 17 पेज की अभिजीत बनर्जी की सीवी में क्या-क्या लिखा है

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भारतीय मूल के अभिजीत बनर्जी (Abhijit Banerjee) को दो अन्य लोगों के साथ संयुक्त रूप से इस साल के अर्थशास्त्र (Economics) का नोबेल प्राइज (Nobel Prize) मिला है. अभिजीत बनर्जी का नोबेल प्राइज मिलना पूरे देश के लिए गर्व की बात है. अभिजीत बनर्जी ने अर्थशास्त्र के क्षेत्र में कितने अहम योगदान दिए हैं, इसका पता उनके 17 पेज लंबे सीवी (CV) से चलता है.

अभिजीत बनर्जी के सीवी में उनके शानदार एकैडमिक करियर के साथ हॉवर्ड और प्रिंसटन यूनिवर्सिटी में उनके ओहदे, उनके लिखे लेख और किताबों की पूरी जानकारी दी गई है. अभिजीत बनर्जी का सीवी मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (MIT) के वेबसाइट पर देखा जा सकती है. अभिजीत एमआईटी में इकोनॉमिक्स पढ़ाते हैं.

अभिजीत बनर्जी के सीवी का पहला पन्ना

अभिजीत बनर्जी के सीवी के पहले पन्ने पर उनके एकैडमिक करियर की जानकारी दी गई है. अभिजीत अपना पूरा नाम अभिजीत विनायक बनर्जी लिखते हैं. 58 साल के अभिजीत का जन्म मुंबई में हुआ. उन्होंने साउथ पॉइंट स्कूल से शुरुआती शिक्षा हासिल की. इसके बाद उन्होंने कोलकाता के प्रेजीडेंसी कॉलेज में दाखिला लिया.

1981 में उन्होंने प्रेजीडेंसी कॉलेज से इकोनॉमिक्स में बीएस की डिग्री ली. इसके बाद उन्होंने दिल्ली के जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में दाखिला लिया. 1983 में उन्होंने जेएनयू से इकोनॉमिक्स में एमए किया. इसके आगे की पढ़ाई करने अभिजीत बनर्जी हॉवर्ड चले गए. 1988 में उन्होंने हॉवर्ड यूनिवर्सिटी से पीएचडी की डिग्री हासिल की. उनकी पीएचडी थीसिस का सब्जेक्ट था- इंफॉर्मेशन इकोनॉमिक्स.

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अपनी पत्नी एस्थर डफलो के साथ अभिजीत बनर्जी

अभिजीत बनर्जी को मिले फेलोशिप और सम्मान

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अभिजीत बनर्जी के सीवी में उन्हें मिले फेलोशिप और सम्मान के बारे में पूरी जानकारी दी गई है. बनर्जी ब्यूरो फॉर द रिसर्च इन द इकोनॉमिक एनालिसिस ऑफ डेवलपमेंट के अध्यक्ष रह चुके हैं. इसके अलावा वो नेशनल ब्यूरो ऑफ इकोनॉमिक रिसर्च में रिसर्च एसोसिएट, सेंटर फॉर इकोनॉमिक एंड पॉलिसी रिसर्च में रिसर्च फेलो, अमेरिकन एकैडमी ऑफ आर्ट्स एंड साइंस और इकोनॉमिक सोसायटी में फेलो और कील इंस्टीट्यूट में इंटरनेशनल रिसर्च फेलो रह चुके हैं. अभिजीत बनर्जी इंफोसिस प्राइज विनर रहे हैं.

अभिजीत बनर्जी की प्रोफेशनल जानकारी

सीवी के दूसरे पेज पर अभिजीत बनर्जी की प्रोफेशनल जानकारी दी गई है. अभिजीत बनर्जी फिलहाल मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (MIT) में इकोनॉमिक्स के प्रोफेसर हैं. 1991 से 1993 के दौरान बनर्जी हॉवर्ड और प्रिंसटन यूनिवर्सिटी में भी पढ़ा चुके हैं.

अभिजीत बनर्जी अब्दुल लतीफ जमील पॉवरटी एक्शन लैब के को-फाउंडर हैं. बनर्जी ने एस्थर डफलो (उनकी पत्नी) और सेंथिल मुलैनाथन के साथ मिलकर अब्दुल लतीफ जमील पॉवरटी एक्शन लैब की स्थापना की थी. ये संस्था गरीबी उन्मूलन की दिशा में काम करती है.

अभिजीत बनर्जी की प्रोफेशनल सर्विस की जानकारी

अभिजीत बनर्जी ने विभिन्न पैनल्स और वर्किंग ग्रुप्स के साथ जो काम किया है, उसकी जानकारी उनके सीवी में दी गई है. अभिजीत बनर्जी यूएन सेक्रेटरी जनरल के मशहूर विशेषज्ञों के हाई लेवल पैनल के सदस्य रह चुके हैं. 2015 के बाद डेवलपमेंट एजेंडा पर इसका गठन हुआ था.

इसके साथ ही वो इवैलुएशन ऑफ वर्ल्ड बैंक रिसर्च के पैनल में भी रह चुके हैं. बनर्जी एडवांस्ड मार्केट कमिटमेंट वर्किंग ग्रुप, सेंटर फॉर ग्लोबल डेवलपमेंट, मेंबर ऑफ बोर्ड एडिटर्स और जर्नल ऑफ इकोनॉमिक लिटरेचर के साथ काम कर चुके हैं.

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अभिजीत बनर्जी

अभिजीत बनर्जी के लिखे लेख और किताबें

अभिजीत बनर्जी के लिखे लेख और किताबों की जानकारी सीवी के तीसरे पन्ने पर दी गई है. उन्होंने चार किताबें लिखी हैं. उनकी किताब Poor Economics को 2011 में गोल्डमैन सैक्स बिजनेस बुक ऑफ द इयर अवॉर्ड मिल चुका है. इस किताब का सत्रह से ज्यादा भाषाओं में अनुवाद हुआ है. बनर्जी की अपनी पत्नी एस्थर डफलो के साथ लिखी किताब को 2012 में गेराल्ड लोएब अवॉर्ड मिला है.

बनर्जी ने अपनी पत्नी एस्थर डफलो के साथ हाल ही में एक और किताब- Good Economics for Hard Times: Better Answers to Our Biggest Problems जल्द ही रिलीज होने वाली है.

डॉक्यूमेंट्री फिल्ममेकर भी हैं अभिजीत बनर्जी

अभिजीत बनर्जी एडिटर और डाक्यूमेंट्री फिल्म मेकर भी रह चुके हैं. उन्होंने तीन किताबें एडिट की हैं और दो डाक्यूमेंट्री फिल्में- 'The Magnificent Journey: Times And Tales of Democracy' और 'The Name of the Disease' बनाईं हैं.

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नोबेल प्राइज

अभिजीत बनर्जी के जर्नल आर्टिकल और वर्किंग पेपर

सीवी के पेज नंबर 4 से लेकर 13 तक उनके लिखे जर्नल आर्टिकल्स और वर्किंग पेपर की जानकारी दी गई है. ये 1984 से लेकर 2019 तक के हैं. बनर्जी ने पहला आर्टिकल Dual Exchange Rate लिखा था, जो 1984 में इकोनॉमिक एंड पॉलिटिकल वीकली में छपा.

हाल ही में उन्होंने अपनी पत्नी एस्थर डफलो, डेनियल केनिस्टन और नीना सिंह के साथ मिलकर एक पेपर लिखा है, जो अगस्त में छपा है.

अभिजीत बनर्जी के लिखे बुक चैप्टर

अभिजीत बनर्जी ने 1997 से लेकर 2017 के बीच कई किताबों के चैप्टर लिखे हैं. इस ओर उनका पहला काम ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी प्रेस में 1990 में छपा. उन्होंने अपनी पत्नी एस्थर डफलो के साथ आखिरी बार Handbook of Field Experiments और Decision Theoretic Approaches to Experiment Design and External Validity में चैप्टर लिखे थे.

सीवी के आखिरी पेज पर उनकी उन पांडुलिपियों (manuscripts) की जानकारी दी गई है, जो अब तक नहीं छपी है. आखिरी पेज पर ही वर्ल्ड बैंक रिपोर्ट के लिए 2003 में लिखे बैकग्राउंड पेपर की जानकारी भी दी गई है.

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