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'मस्जिद के लिए जमीन देने की बात कभी दूसरा पक्ष क्यों नहीं कहता'

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राम मंदिर पर मौलाना रशीद फिरंगी का बड़ा बयान, ‘कभी दूसरा पक्ष ज़मीन देने की बात क्यों नहीं कहता’
मुस्लिम धर्मगुरू खालिद रशीद फिरंगी महली ने अयोध्या मसले पर बड़ी बात कही है

गुरुवार को लखनऊ (Lucknow) में एएमयू (AMU) के पूर्व वीसी जमीरउद्दीन शाह (zameer uddin shah) ने कहा था कि अयोध्या का फैसला मुसलमानों (Muslims) के हक में भी आ जाए तो वो ज़मीन राम मंदिर (Ram Mandir) के लिए तोहफे में दे दें.

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 11, 2019, 11:30 AM IST
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नई दिल्ली. इंडियन मुस्लिम्स (Indian Muslims) फॉर पीस के बैनर तले लखनऊ (Lucknow) में हुई मुस्लिम बुद्धजीवियों की बैठक में दिए गए प्रस्ताव पर धर्मगुरु मौलाना खालिद रशीद फिरंगी महली ने (Maulana khalid rasheed firangi mahali) ने बड़ा सवाल खड़ा किया है. मामला अयोध्या से जुड़ा है. न्यूज18 हिन्दी से बात करते हुए  महली ने कहा कि “कभी-कभी दूसरा पक्ष क्यों नहीं कहता हम जीत जाएं तो मुसलमानों को ज़मीन दे दो. और फिर अभी जल्दी क्या है. अभी तो कोर्ट में मामला चल रहा है.”

कैसे पता मुसलमानों के पक्ष में फैसला आने पर हालात ठीक नहीं होंगे?

इंडियन मुस्लिम्स (Indian Muslims) फॉर पीस की बैठक में अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (एएमयू) के पूर्व वीसी और लेफ्टीनेंट जनरल रिटायर्ड जमीरउद्दीन शाह ने कहा था कि “अगर सुप्रीम कोर्ट का फैसला हमारे पक्ष में आ भी जाए तो मस्जिद बनना मुमकिन नहीं है.” इस पर मौलाना रशीद फिरंगी ने कहा, “बैठक करने वालों को कैसे पता कि उस वक्त हालात ठीक नहीं होंगे. अगर बात सिर्फ हालात की है तो उसकी जिम्मेदारी सुप्रीम कोर्ट की है. ये मामला आप उस पर ही छोड़ दीजिए.”

सुप्रीम कोर्ट पर भरोसा क्यों नहीं?

फिरंगी ने ये भी कहा, “सुनवाई पूरी होने वाली है. फैसला भी जल्द आ जाएगा. जब सुनवाई हो रही है और फैसला भी जल्द आना है तो ये कौन लोग हैं जिन्हें सुप्रीम कोर्ट पर भरोसा नहीं है. अरे भाई कम से कम कोर्ट के फैसले का इंतजार तो कर लो. और अगर आपको कुछ कहना भी है तो सुप्रीम कोर्ट के सामने कहो, कोर्ट को लिखकर दो. बाकी तो ये फिर आपकी राय है और राय रखने का सबको हक है.”

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बैठक में यह प्रस्ताव भी पास हुआ कि मंदिर-मस्जिद की ज़मीन का फैसला कोर्ट के बाहर कर लिया जाए.  इस पर मौलाना रशीद ने कहा “ये काम सिर्फ कहने भर से नहीं होगा. इसके लिए भी कोर्ट में जाना होगा और जो भी ज़मीन के पक्षकार हैं उनकी रजामंदी भी लेनी होगी.”

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First published: October 11, 2019, 11:29 AM IST

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