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सुप्रीम कोर्ट ने कहा-मां के साथ पिता का प्यार भी बच्चे के लिए जरूरी

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बच्चे की कस्टडी पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा-मां के साथ पिता का प्यार भी बच्चे के लिए जरूरी
बच्चे की कस्टडी पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि पिता के प्यार और स्नेह की भी जरूरत

इलाहाबाद हाईकोर्ट (Allahabad High Court) ने 5 साल के बच्चे कस्टडी को लेकर अपने फैसले में पिता के अधिकार से इनकार नहीं किया था. कोर्ट ने कहा था कि पिता अपने बच्चे से महीन में दो बार मिल सकते हैं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 12, 2019, 11:47 AM IST
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नई दिल्ली. सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने बच्चे की कस्टडी (ssential for child) के एक मुकदमा की सुनवाई के दौरान बड़ी बात कही है. कोर्ट ने कहा है कि बच्चे को अपने पिता से भी पर्याप्त समय और प्यार मिलना चाहिए. दरअसल कोर्ट ने अलग हो चुके एक कपल के बच्चे को लेकर मुकदमे की सुनवाई के दौरान यह टिप्पणी की. कोर्ट ने आगे कहा कि हालांकि माता का प्यार जरूरी है, लेकिन पिता के बच्चे से मिलने और कस्टडी के अधिकार को दरकिनार नहीं किया जा सकता है. एक बच्चे को दोनों के ही लगाव और प्यार की जरूरत होती है.

सुप्रीम कोर्ट में मामले की सुनवाई कर रहे बेंच के प्रमुख न्यायाधीश जस्टिस दीपक गुप्ता ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के फैसले को बदलते हुए ये बात कही. बता दें कि इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 5 साल के बच्चे कस्टडी को लेकर अपने फैसले में पिता के अधिकार से इनकार नहीं किया था. कोर्ट ने कहा था कि पिता अपने बच्चे से महीन में दो बार मिल सकते हैं. हाई कोर्ट ने आगे कहा कि इस उम्र में बच्चे को माता की कस्टडी की अधिक जरूरत होती है.

हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ पिता ने सुप्रीम कोर्ट ेमें की थी अपील
उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद निवासी पिता ने हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी. अपनी याचिका में उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि एक पिता को अपने बच्चे से मिलने के लिए इस तरह से प्रतिबंधित नहीं किया जा सकता है. पिता को बच्चे से मिलने का उचित अधिकार दिया जाना चाहिए.

सुप्रीम कोर्ट पिता के विचार से सहमत था कि माता-पिता के झगड़े में बच्चे को उसके अधिकार से बंचित नही किया जा सकता. उसका दोनों के प्यार और स्नेह की जरूरत है. अदालत ने कहा ने कहा कि परिवार को अदालत का यह निर्देश है कि वह बच्चे से मिलने का अधिकार इस प्रकार तय करें कि उसे दोनों का प्यार और स्नेह मिल सके. कोर्ट ने कहा कि यह बच्चे का अधिकार है.

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First published: October 12, 2019, 11:45 AM IST

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