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विजयादशमी के दिन बंगाल में महिलाएं क्यों खेलती हैं सिंदूर खेला, ये है कारण

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विजयादशमी के दिन बंगाल में महिलाएं क्यों खेलती हैं सिंदूर खेला, ये है कारण
हिंदू धर्म में सिंदूर का बहुत बड़ा महत्व होता है. सिंदूर को महिलाओं के सुहाग की निशानी कहते हैं.

नवरात्रि के 10वें यानी दशमी के दिन शादीशुदा महिलांए सबसे पहले दुर्गा मां को सिंदूर लगाती हैं. इसके बाद एक दूसरे को सिंदूर लगाती हैं.

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  • Last Updated: October 6, 2019, 10:17 AM IST
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नवरात्रि (Navratri) हिन्‍दुओं के प्रमुख त्‍योहारों में से एक हैं जिसे दुर्गा पूजा (Durga Puja) के नाम से भी जाना जाता है. नवरात्रि के दौरान मां दुर्गा के सभी नौ रूपों की पूजा-अर्चना की जाती है. नवरात्रि के नौ दिनों को बेहद पवित्र माना जाता है. मान्यता है कि नवरात्रि के दिनों में मां के दर्शन और पूजन से विशेष फल मिलता है. इस समय मंदिर जाकर देवी मां के दर्शन करने से जीवन में सफलता मिलती है. सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है. इस मौके पर कई लोग घर में कलश स्थापित करते हैं और व्रत रखते हैं.

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शादीशुदा महिलांए दुर्गा मां को सिंदूर लगाती हैं

भारतीय शास्त्रों में नवरात्रि में निर्वहन की जाने वाली परंपराओं का बड़ा महत्व बताया गया है. इन नौ दिनों में कई मान्यताएं और परंपराएं प्रचलित हैं, जिन्हें हमारे बड़े-बुजुर्गों ने हमें सिखाया है. हर कोई चाहता है कि देवी की पूजा पूरी श्रद्धा-भक्ति से हो ताकि परिवार में सुख-शांति बनी रहे. वहीं नवरात्रि के 10वें यानी दशमी के दिन शादीशुदा महिलांए सबसे पहले दुर्गा मां को सिंदूर लगाती हैं. इसके बाद एक दूसरे को सिंदूर लगाती हैं. इसे सिंदूर खेला कहते हैं. बंगाल में इसका काफी प्रचलन है. दशमी पर सिंदूर लगाने की पंरपरा सदियों से चली आ रही है. बंगाली समाज में इसे एक अलग अहमियत दी जाती है. आइए आपको बताते हैं दशमी पर मां के विसर्जन से पहले महिलाएं सिंदूर से क्यों खेलती हैं.

सिंदूर को महिलाओं के सुहाग की निशानी कहते हैं

मान्यता है कि मां दुर्गा साल में एक बार अपने मायके आती हैं और वह अपने मायके में पांच दिन तक रुकती हैं. इसी को दुर्गा पूजा के रूप में मनाया जाता है. कहा जाता है कि मां दुर्गा मायके से विदा होकर जब ससुराल जाती हैं, तो सिंदूर से उनकी मांग भरी जाती है. साथ ही दुर्गा मां को पान और मिठाई भी खिलाई जाती है. हिंदू धर्म में सिंदूर का बहुत बड़ा महत्व होता है. सिंदूर को महिलाओं के सुहाग की निशानी कहते हैं. सिंदूर को मां दुर्गा के शादीशुदा होने का प्रतीक माना जाता है. इसलिए दशमी पर सभी शादीशुदा महिलांए एक दूसरे को सिंदूर लगाती हैं. सिंदूर लगाने की इस पंरपरा को सिंदूर खेला कहते हैं.

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सुहाग की कामना

यह भी कहा जाता है कि दुर्गा मां की मूर्ति के विसर्जन के समय सारी महिलाएं एक-दूसरे के सुहाग की कामना और खुशहाली के लिए एक दूसरे पर सिंदूर लगाती हैं. साथ ही यह भी मानते हैं कि इस दिन को शादीशुदा महिलाएं एक दूसरे पर सिंदूर लगाकर मां दुर्गा के फेयरवेल के रूप में मनाती हैं.

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First published: October 6, 2019, 8:31 AM IST

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