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यूरोपीय सांसद आज करेंगे कश्मीर का दौरा, विपक्ष ने उठाए सवाल

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नई दिल्ली. यूरोपीय सांसदों (European Lawmakers) का एक दल आज कश्मीर का दौरा करेगा. अनुच्छेद 370 (Article 370) हटाए जाने के बाद ये पहला मौका है जब कोई विदेशी प्रतिनिधिमंडल कश्मीर दौरे पर जाएगा. इस दल में 27 सांसद शामिल हैं. घाटी की स्थिति के बारे में पाकिस्तानी दुष्प्रचार का मुकाबला करने के लिए सरकार की ये एक बड़ी कूटनीतिक पहल है जिसके तहत उन्हें विकास और शासन को लेकर भारत की प्राथमिकताओं के बारे में स्पष्ट जानकारी दी जाएगी.

पीएम मोदी ने की मुलाकात
यूरोपीय संसद के इन सदस्यों ने अपनी दो दिवसीय कश्मीर यात्रा के पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की. प्रधानमंत्री मोदी ने स्पष्ट रूप से उन्हें बताया कि आतंकवाद का समर्थन और उसे प्रायोजित करने वालों के खिलाफ तत्काल कार्रवाई की आवश्यकता है. प्रधानमंत्री ने कहा कि इस दौरे से शिष्‍टमंडल को जम्‍मू, कश्‍मीर और लद्दाख क्षेत्र की सांस्‍कृतिक और धार्मिक विविधता को बेहतर ढंग से समझने में मदद मिलेगी और इसके साथ ही वे इस क्षेत्र के विकास और शासन से संबंधित प्राथमिकताओं की सही स्थिति से अवगत होंगे.

दो दिवसीय यात्रा

सूत्रों के अनुसार, प्रतिनिधिमंडल जम्मू कश्मीर प्रशासन के अधिकारियों और स्थानीय लोगों से मुलाकात करेगा. दो दिवसीय यात्रा के दौरान, वे राज्यपाल से भी मुलाकात कर सकते हैं. उनके मीडिया के साथ बातचीत करने की भी संभावना है. प्रतिनिधिमंडल में इटली के फुल्वियो मार्तुसिएलो, ब्रिटेन के डेविड रिचर्ड बुल, इटली की जियाना गैंसिया, फ्रांस की जूली लेंचेक, चेक गणराज्य के टामस डेकोवस्की, स्लोवाकिया के पीटर पोलाक और जर्मनी के निकोलस फेस्ट शामिल हैं.

डेकोवस्की ने पीटीआई से कहा, ‘‘ये (अनुच्छेद 370 का हटाया जाना) भारत का आंतरिक मामला है क्योंकि कश्मीर इसका हिस्सा है. ये भारत सरकार का विशेषाधिकार है कि वो आंतरिक फैसला करे. हम इस पर भारत के साथ हैं.’


डोभाल मिले सांसदों से
राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने भी सांसदों को पाकिस्तान से पनपने वाले सीमा पार आतंकवाद, अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद जम्मू कश्मीर के दर्जे में किए गए संवैधानिक बदलाव और घाटी की स्थिति से अवगत कराया. प्रतिनिधिमंडल में नौ देशों के सदस्य हैं. डोभाल ने यूरोपीय सांसदों के लिए दोपहर का भोज दिया. इसमें कुछ कश्मीरी नेता भी शामिल हुए जिनमें जम्मू-कश्मीर के पूर्व उपमुख्यमंत्री मुजफ्फर बेग, पूर्व पीडीपी नेता अल्ताफ बुखारी, राज्य में प्रखंड विकास परिषद् (बीडीसी) के कुछ नव-निर्वाचित सदस्य और रीयल कश्मीर फुटबॉल क्लब के सह- मालिक संदीप चट्टू भी शामिल थे.

विपक्षी दलों ने किया विरोध
हालांकि, इस पहल की विपक्षी दलों ने तीखी आलोचना की और कांग्रेस ने सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि वो यूरोपीय सांसदों को वहां जाने की अनुमति दे रही है लेकिन भारतीय नेताओं को ऐसा करने से रोक रही है जो भारत के लोकतंत्र और इसकी संप्रभुता का अपमान है.

पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने ट्वीट किया, 'उम्मीद है कि उन्हें लोगों, स्थानीय मीडिया, डॉक्टरों और नागरिक समाज के सदस्यों से बातचीत करने का मौका मिलेगा. कश्मीर और दुनिया के बीच के लोहे के आवरण को हटाने की जरूरत है. जम्मू-कश्मीर को अशांति की ओर धकेलने के लिए भारत सरकार को जवाबदेह बनाया जाना चाहिए.’’ उन्होंने अमेरिकी सीनेटरों को अनुमति नहीं देने के केंद्र के फैसले पर सवाल उठाया.

राहुल गांधी ने उठाए सवाल
यूरोपीय सांसदों के प्रस्तावित जम्मू-कश्मीर दौरे को लेकर कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने नरेंद्र मोदी सरकार पर निशाना साधा है और दावा किया कि भारतीय सांसदों को रोकने और विदेशी नेताओं को वहां जाने की अनुमति देने में 'कुछ न कुछ बहुत गलत है.' उन्होंने ट्वीट कर कहा, 'यूरोप से आए सांसदों का जम्मू-कश्मीर का दौरा करने के लिए स्वागत है जबकि भारतीय सांसदों के प्रवेश पर पाबंदी लगा दी जाती है. कुछ न कुछ ऐसा है जो बहुत गलत है.'

(भाषा इनपुट के साथ)

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