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भीमा-कोरेगांव मामला : CJI के बाद जस्टिस गवई भी गौतम नवलखा की सुनवाई से हटे

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भीमा-कोरेगांव मामला : CJI गोगोई के बाद जस्टिस गवई भी गौतम नवलखा की सुनवाई से हटे
भीमा-कोरेगांव मामला : CJI के बाद जस्टिस गवई भी गौतम नवलखा की सुनवाई से हटे

जस्टिस बी.आर. गवई (Justice BR Gavai) से पहले भारत के मुख्य न्यायाधीश Chief Justice of India) रंजन गोगोई (Ranjan Gogoi) ने भी गौतम नवलखा (Gautam Navlakha) की याचिका पर सुनवाई से खुद को अलग कर लिया था.

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नई दिल्ली. भीमा-कोरेगांव हिंसा (Koregaon-Bhima violence) मामले में सामाजिक कार्यकर्ता गौतम नवलखा (Gautam Navlakha) के खिलाफ दर्ज एफआईआर निरस्त करने संबंधी उनकी याचिका की सुनवाई से जस्टिस बी.आर. गवई (Justice BR Gavai) ने खुद को अलग कर लिया है. जस्टिस गवई से पहले भारत के मुख्य न्यायाधीश Chief Justice of India) रंजन गोगोई (Ranjan Gogoi) ने भी इस मामले की सुनवाई से खुद को अलग कर लिया था.

न्यायमूर्ति एनवी रमण, न्यायमूर्ति आर सुभाष रेड्डी और न्यायमूर्ति बी आर गवई की पीठ के समक्ष मंगलवार को नवलखा की अपील सुनवाई के लिए आई थी. इस पर न्यायमूर्ति गवई ने नवलखा की अपील पर सुनवाई करने से खुद को अलग कर लिया. शीर्ष अदालत ने कहा कि नवलखा की अपील अब तीन अक्टूबर को किसी अन्य पीठ के समक्ष सूचीबद्ध की जाएगी. इससे पहले, सोमवार को गौतम नवलखा की याचिका प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई, न्यायमूर्ति एस ए बोबडे और न्यायमूर्ति एस अब्दुल नजीर की पीठ के समक्ष सूचीबद्ध हुई थी, लेकिन प्रधान न्यायाधीश ने इसकी सुनवाई से खुद को अलग कर लिया था.

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31 दिसंबर 2017 को पुणे जिले के भीमा-कोरेगांव में कार्यक्रम के एक दिन बाद कथित रूप से हिंसा भड़क गई थी.

इस मामले में महाराष्ट्र सरकार ने कैविएट दाखिल कर रखी है ताकि उसका पक्ष सुने बगैर कोई आदेश पारित नहीं किया जाए. उच्च न्यायालय ने 2017 में कोरेगांव-भीमा हिंसा और माओवादियों से कथित संबंधों के मामले में दर्ज प्राथमिकी निरस्त करने से 13 सितंबर को इंकार कर दिया था. उच्च न्यायालय ने कहा था कि इस मामले में पहली नजर में ठोस सामग्री है. उच्च न्यायालय ने कहा था कि इस मामले की गंभीरता को देखते हुए इसकी गहराई से जांच की आवश्यकता है.

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13 सितंबर को उच्च न्यायालय ने माओवादी संपर्कों के लिए नवलखा के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी को रद्द करने से इनकार कर दिया था.

क्या है पूरा मामला
13 सितंबर को उच्च न्यायालय ने 2017 में कोरेगांव-भीमा हिंसा और कथित माओवादी संपर्कों के लिए नवलखा के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी को रद्द करने से इनकार कर दिया था. उच्च न्यायालय ने कहा कि मामले की गंभीरता को देखते हुए हमें लगता है कि विस्तृत जांच की जरूरत है. पुणे पुलिस ने 31 दिसंबर 2017 को एल्गार परिषद के बाद जनवरी 2018 में नवलखा और अन्यों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की थी. एल्गार परिषद आयोजित करने के एक दिन बाद पुणे जिले के कोरेगांव भीमा में हिंसा भड़क गई थी.

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First published: October 2, 2019, 9:23 AM IST

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