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शिवसेना का BJP पर तंज- दिल्ली की हवा बिगड़ी, महाराष्ट्र की नहीं बिगड़नी चाहिये

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शिवसेना का BJP पर तंज- दिल्ली की हवा बिगड़ी, महाराष्ट्र की नहीं बिगड़नी चाहिये
शिवसेना ने दिल्ली की कानून-व्यवस्था पर सामना में एक संपाकीय लिखा है. (फाइल फोटो)

संपादीय में शिवसेना ने भाजपा (BJP) की प्रशासनिक क्षमता पर सवाल उठाये हैं. 'सामना' (saamana) ने संपादकीय में लिखा, 'दिल्ली की हवा बिगड़ गई इसलिए महाराष्ट्र (Maharashtra) की हवा नहीं बिगड़नी चाहिए. दिल्ली में पुलिस ने ही कानून तोड़ा और सड़क पर उतर आई, यह अराजकता की चिंगारी है.

  • News18India
  • Last Updated: November 10, 2019, 10:08 AM IST
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मुंबई. शिवसेना (Shiv Sena) के मुखपत्र सामना (saamana) में एक लेख लिखा है, जिसमें भाजपा (BJP) पर किया गया है. इस संपादकीय (Editorial) के जरिये शिवसेना ने भाजपा (BJP) की प्रशासनिक क्षमता पर भी सवाल उठाये हैं. 'सामना' (saamana) ने संपादकीय में लिखा, 'दिल्ली की हवा बिगड़ गई इसलिए महाराष्ट्र (Maharashtra) की हवा नहीं बिगड़नी चाहिए.

दिल्ली में पुलिस ने ही कानून तोड़ा और सड़क पर उतर आई, यह अराजकता की चिंगारी है. महाराष्ट्र में राजनैतिक अराजकता का माहौल बनाने का प्रयास करनेवालों के लिए यह सबक है. इसलिए महाराष्ट्र का निर्णय महाराष्ट्र में ही होना चाहिये.'

सामना ने अपने संपादकीय मं लिखा, 'देश को एक प्रखर गृहमंत्री मिल गए हैं फिर भी राजधानी दिल्ली में पुलिस ने बगावत की. पुलिस और उनके परिवार सड़क पर उतर आए. पुलिसवालों ने ही न्याय के लिए मोर्चा निकाला. इस वजह से दिल्ली की कानून-व्यवस्था बिगड़ गई और अराजकता जैसी स्थिति बन गई.'

पुलिस ने अपने आयुक्त की बात नहीं मानी

पहले पुलिस और वकीलों के बीच मारपीट हुई. इस पूरे मामले में पुलिसवालों ने दिल्ली पुलिस आयुक्त का आदेश नहीं माना और वकीलों ने उच्च न्यायालय का आदेश नहीं माना. देश की राजधानी दिल्ली में कानून-व्यवस्था 72 घंटे अस्तित्वहीन रही ये स्थिति ठीक नहीं है.

दिल्ली आज भी केंद्रशासित प्रदेश है इसलिए दिल्ली में कानून-व्यवस्था की जिम्मेदारी केंद्र की ही है. महाराष्ट्र में बाबासाहेब भोसले के समय इसी तरह पुलिसवालों ने बगावत की थी. पुलिस हाथ में बंदूक लेकर उतर आई. राज्य को बंदी बना लिया. दिल्ली का भी माहौल पुलिस की बगावत के कारण ऐसा ही हो गया है.

जनता पर सरकार अपने फैसले को लाद रही है

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सामना के संपदकीय में नैतिकता पर भी लिखा गया है. इसमें लिखा कि नैतिकता की गप फिलहाल कौन हांक रहा है? रोज व्यभिचारियों की तरह बर्ताव करनेवाले दूसरों को नैतिकता का पाठ पढ़ाते हैं तब हैरानी होती है. जनता बुद्धिहीन हो गई है, ऐसी उन्हें गलतफहमी है. इसलिए जो चाहे वो निर्णय उन पर लादा जाए, ये मानो तय करके ही किया गया है. देश के युवा रोजगार मांग रहे हैं
आज देश के बहुसंख्य मेहनतकश हाथों के लिए काम नहीं है. किसानी करके जीवनयापन करनेवाले बेरोजगार हो गए हैं क्योंकि शासकों के मन से काम करने की और पसीना बहाने की भावना ही नष्ट हो गई है. हमेशा की राजनीति व साजिश ही मानो काम बन गई है. महाराष्ट्र में ऐसा क्यों हो रहा है?

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First published: November 10, 2019, 10:06 AM IST

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