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जब राममंदिर आंदोलन के प्रमुख चेहरा रहे आडवाणी लिखा करते थे फिल्मों की समीक्षा

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राममंदिर आंदोलन (Ram Mandir movement) से देश की राजनीति बदल देने वाले लालकृष्ण आडवाणी (Lal Krishna Advani) आज 92 साल के हो गए. बीजेपी (BJP) के वरिष्ठ नेता आडवाणी ने 1990 में राममंदिर आंदोलन की शुरुआत की थी. उन्होंने अयोध्या में राम मंदिर निर्माण की मांग को लेकर सोमनाथ से अयोध्या तक रथयात्रा की थी. उनकी रथयात्रा ने देश की राजनीति बदलकर रख दी.

1992 के अयोध्या राममंदिर आंदोलन उनके नेतृत्व में हुई. जिस वक्त पूरा देश अयोध्या में राममंदिर निर्माण को लेकर सुप्रीम कोर्ट के आदेश का इंतजार कर रहा है. आडवाणी राजनीतिक पृष्ठभूमि में चले गए हैं.

जनसंघ से की राजनीति की शुरुआत
लालकृष्ण आडवाणी का जन्म पाकिस्तान के सिंध प्रांत में हुआ था. उनकी शुरुआती पढ़ाई कराची में हुई. उन्होंने पाकिस्तान के पूर्व राष्ट्रपति परवेज मुशर्रफ के साथ सेंट पैट्रिक हाईस्कूल में पढ़ाई की है. उसके बाद उन्होंने सिंध कॉलेज से पढ़ाई की. बाद में उनका परिवार मुंबई आ गया. लालकृष्ण आडवाणी जब 14 साल के थे तब वो संघ से जुड़ गए.

1951 में वो जनसंघ से जुड़े. उसके बाद 1977 में जनता पार्टी का साथ निभाया. 1980 में बीजेपी का उदय हुआ. इसके साथ ही भारत की राजनीति में अटल आडवाणी युग की शुरुआत हुई. अटल आडवाणी की जोड़ी ने देश की राजनीति की दिशा बदल दी.

आडवाणी अपने सियासी सफर में कई अहम पदों पर रहे. 1977 में सूचना प्रसारण मंत्री बने तो साल 2002 में उप-प्रधानमंत्री. 2009 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी की हार उनके लिए बड़ा झटका साबित हुई. उसके बाद बीजेपी में नई पीढ़ी के आगमन के लिए उन्होंने रास्ता छोड़ दिया. उनकी राजनीतिक सक्रियता कम हो गई.

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लाल कृष्ण आडवाणी

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जब फिल्मों की समीक्षा लिखा करते थे आडवाणी
कम ही लोगों को पता है कि लालकृष्ण आडवाणी कभी हिंदी फिल्मों की समीक्षा भी किया करते थे. आडवाणी संघ की पत्रिका आर्गेनाइजर और मदरलैंड में फिल्मों के रिव्यू भी किया करते थे. उन्हें गंभीर फिल्म समीक्षक माना जाता था. उनकी फिल्म समीक्षा में संघ के नजरिए की झलक दिखा करती थी. उनके रिव्यू को छापने के लिए एक कॉलम बनाया गया था. उस कॉलम का नाम था- Cine Notes by Netra आडवाणी को उन दिनों फिल्में देखने का शौक था. अटल बिहारी वाजपेयी और आडवाणी का एक किस्सा बड़ा मशहूर है. ये 1958 का वाकया है. उनदिनों अटल बिहारी वाजपेयी और लालकृष्ण आडवाणी जनसंघ में हुआ करते थे. जनसंघ की दिल्ली लोकल बॉडी के चुनावों में हार का मुंह देखना पड़ा था.

जब चुनाव हारने पर अटल-आडवाणी ने फिल्म देखी
अटल बिहारी वाजपेयी और लालकृष्ण आडवाणी ने उस चुनाव के लिए बड़ी मेहनत की थी. हार से दोनों दुखी थे. उनदिनों अजमेरी गेट में जनसंघ का दफ्तर हुआ करता था और पास ही में पहाड़गंज में थिएटर. आडवाणी को उदास देखकर अटलजी ने कहा कि चलो कहीं फिल्म देखने चलते हैं. उसके बाद दोनों ने मिलकर राजकपूर की फिल्म फिर सुबह होगी देखी थी.

आडवाणी ने उनदिनों को याद करते हुए एक इंटरव्यू में कहा था- ‘जनसंघ के दिनों में हम एक उपचुनाव हार गए थे. इससे हम सब बहुत दुखी थे. निराशा में शांत चुपचाप बैठे थे. अचानक अटलजी ने कहा कि चलो कोई फिल्म देखने चलते हैं. पहले तो मैं चौंका लेकिन फिर झट से तैयार हो गया. हम दोनों दिल्ली में इंपीरियल सिनेमा गए. वहां फिर देखा तो राजकपूर की फिल्म फिर सुबह होगी लगी थी. हमने टिकट लिया और फिल्म देखने चले गए.’

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लालकृष्ण आडवाणी

आडवाणी ने फिल्म देखने के बाद अटल बिहारी वाजपेयी से कहा था कि आज हम हारे हैं, लेकिन आप देखिएगा सुबह जरूर होगी. उनकी बात सच साबित हुई.

आडवाणी अक्सर फिल्में देखा करते थे. लेकिन राजनीति में सक्रिय होने के बाद उनके पास वक्त कम रहने लगा. उन्हें आमिर खान की फिल्में पसंद आती हैं. आमिर खान ने अपनी फिल्म सीक्रेट सुपरस्टार उन्हें खासतौर पर दिखाई थी. आडवाणी उनकी 3 इडियट्स और पीके जैसे फिल्में भी देख चुके हैं.

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