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आईबी को मिले कई इनपुट, गिरीश चंद्र मुर्मू आतंकियों के हिटलिस्ट में

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आईबी को मिले कई इनपुट, गिरीश चंद्र मुर्मू आतंकियों के हिटलिस्ट में
गिरीश चंद्र मुर्मू आतंकियों के हिटलिस्ट में

केंद्रीय खुफिया एजेंसी आईबी (Central Intelligence Agency) ने साफ तौर पर बताया है कि हाल में ही जम्मू कश्मीर के उपराज्यपाल पर हमले करवाने से संबंधित कई इनपुट लगातार मिल रहे हैं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: November 7, 2019, 9:53 AM IST
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जम्मू-कश्मीर. जम्मू कश्मीर (Jammu-Kashmir) के उपराज्यपाल गिरीश चंद्र मुर्मू (Girish Chandra Murmu) आतंकियों के हिटलिस्ट में हैं, उन पर आतंकी एक बड़े हमले को अंजाम देना चाहता है. केंद्रीय खुफिया एजेंसी आईबी ने जम्मू कश्मीर, लद्दाख सहित कई राज्यों की पुलिस को इस मामले में एक अलर्ट मिलने के बाद सतर्क किया है. जिसमें साफ तौर पर बताया गया है कि हाल में ही जम्मू कश्मीर के उपराज्यपाल पर हमले करवाने से संबंधित कई इनपुट लगातार मिल रहे हैं. उपराज्यपाल गिरीश चंद्र मुर्मू के ऊपर पाकिस्तानी आतंकवादी संगठन के आतंकी आत्मघाती हमले को अंजाम देना चाहते हैं. मुर्मू बेहद सहज और सरल इंसान हैं इसलिए वो आम आदमी के साथ बेहद आसानी से सरलता से मुलाकात भी करते रहते हैं लेकिन आतंकी इसी विश्वास का फायदा उठाकर हमले को अंजाम देना चाहता है. लिहाजा इस तरह के संदिग्ध इनपुट मिलने के बाद जल्द ही उनकी सुरक्षा व्यवस्था को और बढ़ाने की केंद्र सरकार घोषणा कर सकती है.

कौन हैं IAS अधिकारी गिरीश चंद्र मुर्मू?
जम्मू कश्मीर में अनुच्छेद-370 (Article 370) को खत्म करके इसी साल 5 अगस्त को जम्मू कश्मीर और लद्दाख को अलग केंद्र शासित प्रदेश बनाया गया था. उसके बाद जम्मू कश्मीर के सबसे पहले उपराज्यपाल के तौर पर 31 अक्टूबर को आईएएस अधिकारी गिरीश चंद्र मुर्मू ने शपथ ग्रहण की. मुर्मू गुजरात कैडर से 1985 बैच के अधिकारी हैं. हालांकि ये मूल रूप से उड़ीसा के मयूरभंज इलाके के रहने वाले हैं. इनकी शुरुआती पढ़ाई ओडिशा से ही हुई. ओडिशा के उत्कल विश्वविद्यालय से पढ़ाई करने के बाद इन्होंने बर्मिघम विश्वविद्यालय से एमबीए की डिग्री हासिल की है.

जब प्रधानमंत्री मोदी गुजरात में मुख्यमंत्री थे तभी से मुर्मू उनके सबसे करीबी और भरोसेमंद अधिकारी माने जाते थे. शायद इसी का तकाजा है कि उनको उस वक्त मुख्यमंत्री मोदी ने अपना प्रमुख सचिव का पद दिया है. उसके बाद जब प्रधानमंत्री मोदी प्रधानमंत्री का पद ग्रहण करके दिल्ली में रहने लगे तो मुर्मू ने भी अपना ट्रांसफर करवाकर रेवेन्यू विभाग में स्पेशल सेक्रेटरी बनें उसके बाद व्यय सचिव.

अनुच्छेद-370 को हटाने का ब्रेन चाइल्ड माना जाता है मुर्मू को
जम्मू कश्मीर से जिस तरह से अनुच्छेद-370 को खत्म करके उसको एक केंद्र शासित प्रदेश बनाया गया. ब्यूरोक्रेसी गलियारों में इस बात की भी चर्चा है कि 370 को खत्म करने का ब्रेन चाइल्ड गिरीश चंद्र मुर्मू ही हैं. जो एक विशेष रणनीति के तहत पिछले कई महीनों से इसी प्रोजेक्ट पर काम कर रहे थे. इस मिशन को बेहद गुप्त रखना भी अपने आप में बेहद चैलेंज वाला काम था. लेकिन इस मिशन को उन्होंने बेहद सतर्कता से अंजाम तक पहुंचाया. जिसका ईनाम देते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने उनके सेवानिवृत्त होने से एक महीने पहले ही नई जिम्मेदारी प्रदान करते हुए जम्मू कश्मीर का उपराज्यपाल बना दिया.

आईबी को टेक्निकल सर्विलांस के जरिये इस बात की भनक लगी है कि आतंकियों के राडार पर गिरीश चंद्र मुर्मू सहित जम्मू कश्मीर में रहने वाले कई अधिकारी और स्थानीय लोग हैं. लेकिन उनकी सुरक्षा व्यवस्था के मद्देनजर उन आम लोगों के नाम का जिक्र नहीं किया जा सकता है.

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मोदी सरकार में कई सरकारी खर्चे को कम करने वाले अधिकारी भी बनें मुर्मू
मुर्मू की काबलियत से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बेहद अच्छी तरह से वाकिफ हैं. लिहाजा जब उनको गुजरात से दिल्ली लाया गया तभी उनको कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी गयी. जिसे उन्होंने सफलतापूर्वक निभाई. मुर्मू के बारे में तो ये भी कहा जाता है कि मौजूदा सरकार में कई बड़े-बड़े सरकारी खर्चे को कम करने का आईडिया इन्होंने ही दिया था, जिसकी काफी तारीफ भी हुई. आज लोग भी कई ऐसे प्रोजेक्ट की तारीफ करते हैं लेकिन उनकी यही तारीफ के काबिल बनना उनके लिए आतंकियों के लिए परेशानी का सबब बन गया है. आतंकियों द्वारा कई आतंकी शिविरों में और ट्रेनिंग के दौरान भी गिरीश चंद्र मुर्मू के नाम पर जहर उगलते हुए आतंकी कहते हैं कि गोधरा समेत जो भी दंगा गुजरात में हुए थे उन दंगों के बारे में मुर्मू पहले से ही जानते थे. ये सभी फर्जी बातों के सहारे कम उम्र के आतंकियों को बहलाया जा रहा है. जिससे उसके आतंकी आका अपने मंसूबों को अंजाम दे सके.

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First published: November 7, 2019, 9:39 AM IST

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