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अब गाड़ियों का इंश्योरेंस क्लेम पाना होगा आसाना, IRDAI ने दिया ये प्रस्ताव

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मोटर इंश्योरेंस क्लेम पाना होगा आसान, बिना सर्वेयर निपट सकेंगे 75 हजार रुपये तक के दावे
बिना सर्वेयर के निपट सकेंगे 75 हजार तक के दावे

IRDAI के मुताबिक, ग्राहकों के लिए इंश्योरेंस क्लेम में लगने वाला समय भी कम हो जाएगा.

  • News18Hindi
  • Last Updated: November 4, 2019, 10:12 AM IST
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नई दिल्ली. मोटर इंश्योरेंस क्लेम सेटलमेंट (Motor Insurance Claim Settlement) को आसान बनाने की प्रक्रिया के तहत इंश्योरेंस रेगुलेटर भारतीय बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण (IRDAI) ने सेल्फ-असेस्मेंट डैमेज की लिमिट को बढ़ाने का प्रस्ताव दिया है. अगर ऐसा होता है तो जल्द ही मोटर इंश्योरेंस (Motor Insurance) के 75 हजार रुपये तक के क्लेप पर नुकसान के मूल्यांकन के लिए किसी सर्वेयर की जरूरत नहीं पड़ेगी. वहीं ग्राहकों के लिए इंश्योरेंस क्लेम में लगने वाला समय भी कम हो जाएगा.

फिलहाल, 50,000 रुपये से ऊपर के मोटर इंश्योरेंस और 1 लाख रुपये से ज्यादा के अन्य दावों के लिए इंश्योरेंस सर्वेयर और लॉस एसेसर्स की सेवाएं लेना जरूरी है. जब दावे के आकलन के लिए सर्वेयर की नियुक्ति की जाती है तो उन्हें दावे की समीक्षा और रिपोर्ट जमा करने के लिए 30 दिन मिलते हैं. इससे दावों के निस्तारण में देरी होती है, क्योंकि बीमा कंपनी रिपोर्ट की समीक्षा के बाद ही कोई फैसला लेती है.

1.50 लाख रुपये तक निपट सकते हैं मामले
मनीकंट्रोल की रिपोर्ट के मुताबिक अब इरडा की नई सिफारिशों को मान लिया जाता है तो मोटर इंश्योरेंस के लिए 75 हजार रुपये और नॉन- मोटर इंश्योरेंस के मामलों में 1.50 लाख रुपये तक दावा ग्राहक कर सकता है. इससे पहले दो समितियों मल्होत्रा समिति और भंडारी समिति ने अपनी रिपोर्ट में सर्वे के लिए नुकसान की सीमा को बढ़ाए जाने का सुझाव दिया था. इन समितियों ने यह भी सुझाव दिया था कि बीमा कंपनियों के भीतर उपलब्ध कार्यबल को नुकसान की इस सीमा तक के लिए इस्तेमाल किया जाना चाहिए, जिससे ऐसे दावों के निस्तारण में तेजी आएगी.

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वीडियो के जरिए क्लेम का हो रहा निपटारा
कई कंपनियां वीडियो के आधार पर भी दावों का निपटारा कर रही हैं. इनमें ग्राहक की ओर से खुद मोबाइल फोन के जरिए नुकसान का वीडियो बनाकर बीमा कंपनियों को भेजा जाता है. इसके अलावा कई कंपनियों ने दावे का निपटारा करने के लिए सर्विस सेंटर्स के साथ भी टाई-अप किया है.

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इसके अलावा बीमा नियामक ने सर्वेयर और लॉस एसेसर्स की लाइसेंसिंग के लिए प्रक्रिया को आसान भी बना दिया है. इरडा ने यह भी प्रस्ताव किया है कि किसी भी मौजूदा लाइसेंस धारक या प्रशिक्षु के तौर पर पंजीकृत कोई भी व्यक्ति और जरूरी परीक्षा उत्तीर्ण करने वाले व्यक्ति को अब कोई लाइसेंसिंग-पूर्व परीक्षा देने की जरूरत नहीं होगी.

20 हजार रुपये से हुई थी शुरुआत
बीमा अधिनियम, 1938 में सामान्य बीमा नीति के अंतर्गत 20 हजार रुपये से ज्यादा नुकसान के निस्तारण के लिए लाइसेंसधारक सर्वेयर और लॉस एसेसर्स के इस्तेमाल को जरूरी बताया गया है. बाद में महंगाई के कारण नॉन-लाइफ पॉलिसीज में नुकसान के दावों के बढ़ने के कारण इस सीमा को बढ़ा दिया गया.


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First published: November 4, 2019, 10:12 AM IST

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