राधा रानी की मृत्यु कैसे हुई थी और भगवान श्री कृष्ण ने अपनी बांसुरी क्यों तोड़ दी थी - AcchiNews.com अच्छी न्यूज़ डॉट कॉम

AcchiNews.Com अच्छी न्यूज़ डॉट कॉम is Hindi Motivational Inspirational quotes site here you can find all positive khabar in hindi.

Earn Money

राधा रानी की मृत्यु कैसे हुई थी और भगवान श्री कृष्ण ने अपनी बांसुरी क्यों तोड़ दी थी

भगवान श्रीकृष्ण से राधा पहली बार तब अलग हुईं जब मामा कंस ने बलराम और कृष्ण को आमंत्रित किया वृंदावन के लोग यह खबर सुनकर दुखी हो गए मथुरा जाने से पहले श्रीकृष्ण राधा से मिले थे राधा कृष्ण के मन में चल रही हर गतिविधि को जानती थीं राधा को अलविदा कह कृष्ण उनसे दूर चले गए कृष्ण राधा से ये वादा करके गए थे कि वो वापस आएंगे लेकिन कृष्ण राधा के पास वापस नहीं आए।

उनकी शादी भी रुक्मिनी से हुई रुक्मिनी ने भी श्रीकृष्ण को पाने के लिए बहुत जतन किए थे श्रीकृष्ण से विवाह के लिए वह अपने भाई रुकमी के खिलाफ चली गईं राधा की तरह वह भी श्रीकृष्ण से बेहद प्रेम करती थीं रुक्मिनी ने श्रीकृष्ण को एक प्रेम पत्र भी भेजा था कि वह आकर उन्हें अपने साथ ले जाएं इसके बाद ही कृष्ण रुक्मिनी के पास गए और उनसे शादी कर ली।

कृष्ण के वृंदावन छोड़ने के बाद से ही राधा का वर्णन बहुत कम हो गया राधा और कृष्ण जब आखिरी बार मिले थे तो राधा ने कृष्ण से कहा था कि भले ही वो उनसे दूर जा रहे हैं लेकिन मन से कृष्ण हमेशा उनके साथ ही रहेंगे इसके बाद कृष्ण मथुरा गए और कंस और बाकी राक्षसों को मारने का अपना काम पूरा किया इसके बाद प्रजा की रक्षा के लिए कृष्ण द्वारिका चले गए और द्वारिकाधीश के नाम से लोकप्रिय हुए।

जब कृष्ण वृंदावन से निकल गए तब राधा की जिंदगी ने अलग ही मोड़ ले लिया था राधा की शादी एक यादव से हो गई राधा ने अपने दांपत्य जीवन की सारी रस्में निभाईं और बूढ़ी हुईं लेकिन उनका मन तब भी कृष्ण के लिए समर्पित था राधा ने पत्नी के तौर पर अपने सारे कर्तव्य पूरे किए दूसरी तरफ श्रीकृष्ण ने अपने दैवीय कर्तव्य निभाए।

Third party image reference

सारे कर्तव्यों से मुक्त होने के बाद राधा आखिरी बार अपने प्रियतम कृष्ण से मिलने गईं जब वह द्वारिका पहुंचीं तो उन्होंने कृष्ण की रुक्मिनी और सत्यभामा से विवाह के बारे में सुना लेकिन वह दुखी नहीं हुईं जब कृष्ण ने राधा को देखा तो बहुत प्रसन्न हुए दोनों संकेतों की भाषा में एक दूसरे से काफी देर तक बातें करते रहे राधा जी को कान्हा की नगरी द्वारिका में कोई नहीं पहचानता था राधा के अनुरोध पर कृष्ण ने उन्हें महल में एक देविका के रूप में नियुक्त किया राधा दिन भर महल में रहती थीं और महल से जुड़े कार्य देखती थीं मौका मिलते ही वह कृष्ण के दर्शन कर लेती थीं लेकिन महल में राधा ने श्रीकृष्ण के साथ पहले की तरह का आध्यात्मिक जुड़ाव महसूस नहीं कर पा रही थीं इसलिए राधा ने महल से दूर जाना तय किया।

Third party image reference

उन्होंने सोचा कि वह दूर जाकर दोबारा श्रीकृष्ण के साथ गहरा आत्मीय संबंध स्थापित कर पाएंगी उन्हें नहीं पता था कि वह कहां जा रही हैं लेकिन भगवान श्रीकृष्ण जानते थे धीरे-धीरे समय बीता और राधा बिलकुल अकेली और कमजोर हो गईं उस वक्त उन्हें भगवान श्रीकृष्ण की आवश्यकता पड़ी।

आखिरी समय में भगवान श्रीकृष्ण उनके सामने आ गए कृष्ण ने राधा से कहा कि वह उनसे कुछ मांगें लेकिन राधा ने मना कर दिया कृष्ण के दोबारा अनुरोध करने पर राधा ने कहा कि वह आखिरी बार उन्हें बांसुरी बजाते देखना चाहती हैं श्रीकृष्ण ने बांसुरी ली और बेहद सुरीली धुन में बजाने लगे श्रीकृष्ण ने दिन रात बांसुरी बजाई जब तक राधा आध्यात्मिक रूप से कृष्ण में विलीन नहीं हो गईं बांसुरी की धुन सुनते सुनते राधा ने अपने शरीर का त्याग कर दिया हालांकि भगवान कृष्ण जानते थे कि उनका प्रेम अमर है इसके बावजूद वे राधा की मृत्यु को बर्दाश्त नहीं कर सके।

Third party image reference

कृष्ण ने प्रेम के प्रतीकात्मक अंत के रूप में बांसुरी तोड़कर झाड़ी में फेंक दी उसके बाद से श्री कृष्ण ने जीवन भर बांसुरी या कोई अन्य वादक यंत्र नहीं बजाया कहा जाता है कि जब द्वापर युग में नारायण ने श्री कृष्ण का जन्म लिया था तब मां लक्ष्मी ने राधा रानी के रूप में जन्म लिया था ताकि मृत्यु लोक में भी वे उनके साथ ही रहे।