राजा महाराजाओं के जमाने के 3 अद्भुत घोड़े, नंबर 1 घोड़े का नाम “लैला” है - AcchiNews.com अच्छी न्यूज़ डॉट कॉम

AcchiNews.Com अच्छी न्यूज़ डॉट कॉम is Hindi Motivational Inspirational quotes site here you can find all positive khabar in hindi.

Earn Money

राजा महाराजाओं के जमाने के 3 अद्भुत घोड़े, नंबर 1 घोड़े का नाम “लैला” है

इतिहास गवाह है की कई युद्ध लड़े गए कई लड़ाइयां का फैसला तो मात्र घोड़ों और उन पर सवार योद्धाओं की भुजाओं में तैर रहे बाहुबल ले कर दिया भारत के इतिहास के उन महायुद्ध को जब हम याद करते हैं तो हमारे सामने हमारे महावीर योद्धाओं की घोड़ों पर सवार गरसती सेना की स्वराज जी की आग वाली दहाड़ सुनाई पड़ती है, तो चलिए शुरू करते हैं। 

3- शिवाजी महाराज के घोड़े


शिवाजी महाराज का मानना था कि योद्धा को अपना घोड़ा बदलते रहना चाहिए शिवाजी महाराज की हिंदवी सेना में भीम थ्री नस्ल के घोड़े रखे जाते थे इन घोड़ों को पहाड़ों पर्वतों पर मराठा योद्धाओं को लेकर चढ़ने के लिए तैयार किया जाता था ताकि पहाड़ों पर से शत्रु पर सीधा प्रहार किया जा सके इसके अलावा अगर किसी शत्रु या सेना को घेरकर मारना होता तो अरबी नस्ल के घोड़ों का उपयोग किया जाता था छात्रपाल शिवाजी महाराज ने अपने 50 सालों के जीवन काल में कुल 7 गुणों का उपयोग किया मोती, विश्वास, गजरा, रणवीर, कृष्णा, तुरंगी और इंद्रायणी महाराजा शिवाजी का सबसे प्रिय घोड़ा “कृष्णा” था।

2- महाराणा प्रताप का घोड़ा 


घोड़ों में गिना जाने वाला महाराणा प्रताप का घोड़ा “चेतक”  जिसे हम बारंबार नमन करते हैं ईरानी मूल का चेतक महाराणा प्रताप का सबसे प्रिय घोड़ा था एक समय की बात है गुजरात का एक व्यापारी अपने तीन घोड़े लेकर मारवाड़ के दरबार में आया जहां महाराणा हुकुम पहले से मौजूद थे व्यापारी के पास तीन घोड़े थे चेतक, त्राटक और अटक चेतक घोड़े की इंद्र श्वेत चमक ने सबको अपना दीवाना बना दिया राणा श्री ने तीनों घोड़े खरीद लिए अटक घोड़े को मारवाड़ में परीक्षण के लिए भेज दिया गया त्राटक घोड़े को महाराणा प्रताप ने अपने भाई शक्ति सिंह को दे दिया और चेतक को महाराणा प्रताप ने अपने लिए चुना हल्दीघाटी के मैदानों में चेतक ने दुश्मन की छाती पर चढ़कर प्रहार किया अपने स्वामी महाराणा प्रताप को सुरक्षित रणभूमि से निकाल लाया और एक बरसाती नाला को पार करने के बाद वीरगति को प्राप्त हुआ।

1- महाराज रणजीत सिंह का घोड़ा 



1799 में महाराजा रणजीत सिंह ने लाहौर के किले पर अपनी जीत का झंडा बुलंद किया महाराजा को घोड़ों से बहुत लगाव था और तो और इनकी सेना में बेहतरीन घोड़े भर्ती किए जाते थे इसी समय महाराजा के दरबार में एक यूरोपीय अफसर बैरन चार्ल्स आया उसने महाराजा को बताया कि पेशावर के सरदार यार मोहम्मद खान के पास सिरी नाम की एक बेहतरीन घोड़ी है जिसकी रफ्तार सबको हैरान कर देती है इस घोड़ी को पाने के लिए महाराजा रणजीत सिंह द्वारा कई दूत यार खान के पास भेजे गए पर वह घोड़ी देने के लिए राजी नहीं हुआ अंत में यूरोपी जनरल बेनतोरा को भेजा गया जो यह घोड़ी लेकर महाराज की सेवा में हाजिर हुआ कहा जाता है कि इस घोड़ी को लाने में उस जमाने के 60 लाख रुपए खर्च किए गए थे महाराजा ने इस घोड़ी को “लैला” नाम दिया था जो महाराजा रणजीत सिंह को बहुत अधिक प्रिय थी।

इतिहास में सबसे महान योद्धा कौन था कमेंट में जरूर बताएं और साथ ही “अच्छी न्यूज़” चैनल को फॉलो, पोस्ट को लाइक व्हाट्सएप, फेसबुक और अदर सोशल मीडिया पर शेयर करना ना भूले। धन्यवाद