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क्या नाथूराम गोडसे को फांसी देते समय आखरी इच्छा पूछी गई थी?अगर हाँ, तो क्या थी अंतिम इच्छा

एक नए लेख में, गांधी की हत्या के आरोप में नाथूराम गोडसे को, सह-अभियुक्त नारायण आप्टे के साथ, अंबाला केंद्रीय कारागार में रखा गया था। वहीं १५ नवंबर १९४९ को उन्हें और आप्टे को फांसी दी गई थी।
अंतिम इच्छा पूछे जाने पर, उन्होंने उसी कारागार-परिसर के एक विशाल वृक्ष से लटका कर फांसी दिये जाने की इच्छा प्रगट की थी। उन्होंने उस टहनी को बाद में काट देने को कहा था, ताकि किसी दूसरे को उससे लटका कर फांसी नहीं दी जा सके। उनकी इस इच्छा का पालन किया गया।
उसके एक रात पहले, उन्होंने अपनी वसीयत लिखी थी। इसमें उन्होंने अपने बीमा आदि से प्राप्त राशि को भाइयों के परिवार में बाँट देने की इच्छा प्रगट की थी। इससे भी महत्वपूर्ण यह है कि उन्होंने अपनी राख को सिंधु नदी में प्रवाहित करने की बात कही थी, जब सिंधु नदी पुनः भारत में बहने लगे। उनकी यह इच्छा पूरी नहीं की जा सकी है। उनका अस्थि-कलश पुणे के एक भवन में, उस दिन के लिए सुरक्षित है, जब उनका अखंड भारत का सपना पूरा होगा।