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पुत्र का कर्ज हिंदी रोचक कहानी।पुनर्जन्म का कर्ज!

प्राचीन समय की बात है,  ! एक गांव में एक ब्राह्मण और एक ब्राह्मणी रहते थे ब्राह्मणी एक साधारण ग्रहणी थी लेकिन ब्राह्मण बहुत ही विद्वान थे रोज सुबह ब्राह्मण गंगा स्नान करके सूर्य को जल देकर भगवान की पूजा पाठ किया करते थे उन दोनों के बीच बहुत ही प्रेम था वहाँ का राजा भी किसी शुभ कार्य को ब्राह्मण की अनुमति के बिना नहीं किया करता था। समय बीतता गया लेकिन ब्राह्मण के घर पुत्र की प्राप्ति नहीं हुई, अब ब्राह्मणी बहुत ही चिंतित रहने लगी तो ब्राह्मण ने पूछा की ब्राह्मणी क्या बात है

आप आज कल बहुत ही चिंतित रहती है,तो ब्राह्मणी ने अपनी चिंता का कारण ब्राह्मण को बताया जिस पर ब्राह्मण बोला की जैसा परमात्मा करता है वैसा ही होता है कुछ समय पश्चात ब्राह्मण के घर एक पुत्र ने जन्म लिया।
अब ब्राह्मणी की खुश का ठिकाना नहीं रहा! लेकिन ब्राह्मण खुश नहीं थे क्योंकि उनकी चिंता का कारण कुछ और ही था, एक दिन ब्राह्मणी ने आकार उनसे पूछा की क्या आप पुत्र की प्राप्ति से खुश नहीं है,

जिस पर ब्राह्मण ने कुछ नहीं कहा लेकिन वो ब्राह्मणी के चेहरे की तरफ देखकर स्तभ रह गए और अपने कार्य मै लग गये सुबह ब्राह्मण जल्दी उठे और उन्होने बच्चे को अपनी गोद में लिया और गंगा स्नान करने गंगा तट पर पहुंचे। उन्होने बच्चे को लिटाया और पूछा की आप ने हमारे घर जन्म क्यों लिया है जिसका जवाब देते हुए बच्चे ने बोला की आप पर मेरा पुनर्जन्म का कर्ज है

जब तक आप मेरा कर्ज मुझे वापस नहीं करेगे तब तक में आप के घर ही रहूगा और जैसे ही मेरा कर्ज अदा हो जाएगा, तब मै आप का घर त्याग दूँगा,जिस पर ब्राह्मण ने पूछा की आपका का कितना कर्ज है। हमारे ऊपर तव बच्चे ने जबाब दिया की केवल 5000 रुपये तव ब्रहम्ण ने ने अपनी जेब से तुरत ही 5000 रुपये बच्चे को दिये तो बच्चा बोला की आप मेरी तरफ से ये रुपए गंगा मै फेक दो तो आप मेरे कर्ज से मुफ्त हो जाओगे ब्रहम्ण ने ऐसा ही किया और बच्चा म्रत्यु को प्राप्त हो गया, और ब्राह्मण घर वापस आ गया खाली हाथ देखकर ब्राह्मणी ने रोना शुरू कर दिया। 

और गाव वालो से कह दिया की वो तो पागल हो गए है गाव वालो ने पूछा कि क्या बात है तो ब्राह्मणी ने बताया की मेरे पति मेरे बच्चे को लेकर गए थे लेकिन खाली हाथ आए है पूछने पर भी कुछ नहीं बताते, जिस पर गाव वालो ने ब्राह्मण से पूछा कि अपने बच्चे को कहाँ छोड़ा है।