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क्या आप जानते है फांसी सूर्योदय पूर्व क्यों दी जाती है, जल्लाद कान में क्या कहता है, देखें

दोस्तों फांसी शब्द सुनते ही लोगों के कान खड़े हो जाते हैं, फांसी न्यायिक दण्ड विभाग की सबसे बड़ी सजा है या यूं कह सकते है कि अंतिम सजा है। हालांकि भारत में फांसी की सजा बहुत ही ज्यादा अपराधिक कार्य करने पर ही दी जाती है। कुछ देशों में फांसी देने की प्रक्रिया बहुत ही आसान है जैसे ईरान, ईराक आदि में, वहीं भारत में यह थोड़ी जटिल प्रक्रिया है, भारत में फांसी की सजा पर अंतिम मोहर राष्ट्रपति द्वारा लगाई जाती है।

फांसी को लेकर आपके और हमारे मन में कई सवाल उठते हैं, जैसे की फांसी कैसे दी जाती है, कहां दी जाती है, फांसी के वक्त जल्लाद कान में क्या कहता है, कैदी को काले कपड़े क्यों पहनाये जाते हैं और उसके हाथ पीछे क्यों बांधे जाते हैं आइए दोस्तों देखते हैं इन सवालों के जवाब

सूर्योदय पूर्व फांसी देना


किसी भी कैदी को फांसी की सजा सूर्योदय से पहले दी जाती है, उसे जिस दिन कोर्ट से डेथ वारंट जारी होता है, तो उसे अन्य कैदियों से अलग डेथ सेल में रखा जाता है जो कि फांसी देने वाले हैं स्थान से लगभग 100 से 150 कदम की दूरी पर होता है। उस कैदी पर 24 घण्टे निगरानी रखी जाती है। सूर्योदय से पूर्व फांसी देने कारण यह है कि दिन भर कैदी के दिमाग में बुरे खयाल चलते है जो मानवता के लिहाज से सही नही है, इसलिए सुबह जल्दी नित्य कार्य करवाकर फांसी दे दी जाती है। इससे बाद में घरवालों को भी अंतिम संस्कार करने का समय मिल जाता है।

कैदी को काले कपड़े पहनाना और हाथ बांधना



दोस्तों जब किसी को फांसी पर लटकाने के लिए ले जा रहे होते हैं तब, उसे काले कपड़े पहना दिए जाते हैं और उसके हाथ पीछे बांधे जाते हैं। इसका कारण यह है कि जब किसी कैदी को फांसी की तरफ ले जा रहे होते हैं, तब कुछ कैदी बहुत ही ज्यादा पेनिक हो जाते है तथा कुछ हाथ छुड़वा कर भागने लगते है तो कभी कभी कैदी शोर मचाने लगते हैं। इस स्थिति से निपटने के लिए कैदी के हाथ बांधे जाते हैं और काले कपड़े पहना दिए जाते हैं, जिससे कैदी ये सब नही कर पाता है और वह मानसिक रूप से भी तैयार हो जाता है कि अब उसे फांसी होने वाली है।

फांसी देने से पूर्व जल्लाद कान में क्या कहता है


 फांसी देने से पूर्व जल्लाद अकेली के कान में कहता है कि भाई मुझे माफ कर देना मैं तो एक सरकारी मुलाजिम हूं इसलिए मैं सरकारी आदेश का पालन कर रहा हूं मैं जानबूझकर तुम्हें फांसी नहीं दे रहा हूं मैं कानून के हाथों मजबूर हूं इतना कहने के बाद वह यदि अकेली हिंदू है तो राम-राम और अगर मुसलमान है तो आखरी दफा सलाम का कर फांसी का फंदा खींच लेता है।


दोस्तों कुछ लोग इतने गिनोने और अपराधिक कार्य करते है कि उनके लिए फांसी की सजा भी कम होती है, लेकिन फांसी के डर से कुछ लोग तो अपराध करने से डरते ही है।