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क्या होगा यदि धरती पर सभी परमाणु बंब एक साथ फट जाएँ? जानिए दिल दहलाने वाला जवाब

विश्व मे अनुमानित लगभग 14 हज़ार के करीब परमाणु हथियार हैं। इसमे फ्यूज़न और फिज़न टाइप वाले दोनों है।

अब वैसे बम अलग अलग यील्ड में आते हैं कुछ किलोटन (KT) से लेकर कई मेगाटन (MT) तक। अधिकतम जो मैंने अब तक सुना है वो रूसी 200 मेगाटन का है जिसे वो Status-6 Oceanic Multipurpose System अथवा पोसाइडन पर इस्तेमाल कर सकते हैं। कितना यील्ड होगा उसकी गणना आप कैलक्यूलेटर पर कर सकते हैं। यहां सिर्फ प्रभाव की चर्चा करेंगे।

अगर आप किसी एयरबेस के पास रहते है तो बहुत हद तक संभावना है कि आप परमाणु विस्फोट की चपेट में आ जाएं। विश्व मे ज्यादातर देशों के लिए परमाणु बम की डिलीवरी एरियल रूट से ही होती है। इसके लिए स्ट्रेटेजिक हथियारों को एयरबेस में सुरक्षित तरीके से रखना होता है। ब्लास्ट रेडियस कितना होगा यह इस पर निर्भर करेगा कि उस एयरबेस में कितने हेड रखें हैं।

अगर आप किसी समुद्री तटीय शहर, गांव, कस्बे में रहते हैं तब भी एक सुनामी आने का खतरा है। जब सम्बरीन के अंदर एक साथ विस्फोट होगा तो बहुत बड़ी लहरें उठेंगी जो आस पास के शहर पर कहर बरपायेंगी। अमेरिकी नौसेना के कई नेवल फ्लीट हमेशा धरती के कोने कोने में चक्कर काटते रहते हैं। हिंद महासागर में अमेरिका की 7th naval fleet तैनात है। जिसे अमेरिका ने पाकिस्तान की मदद करने के लिए 1971 में भारत के विरुद्ध भेजा था। रूस ने उस समय हमारी मदद की और सफलतापूर्वक अमेरिकी हमले को रोक दिया। रूस की गिनती ऐसे ही हमारे दोस्तों में नही होती। इसके मज़बूत कारण भी हैं। इसकी पूरी कहानी किसी उत्तर में सुनाऊंगा।

इसी तरह रूस के चीन के सबमरीन हमेशा महत्वपूर्ण सैन्य ठिकानों पर गश्त लगाते रहते हैं। इन सब मे अगर एक साथ विस्फोट हुआ तो तटीय इलाके वाले तो सुनामी से मर जायेंगे। वो भी रेडियोएक्टिव सुनामी।

लगभग सारे ही सैन्य ठिकाने तबाह हो जाएंगे। बिना दूरसंचार के साधनों के जो बचेंगे भी उनका कोई अर्थ ही नही रह जायेगा।

थोड़ा लाभ उन लैंड लॉक्ड (landlocked) अफ़्रीकी देशो को मिलेगा जिनके पास ना कोई सामरिक शक्ति है ना ही परमाणु हथियार। इनके पास एक संधि है जिसमें इन्होंने अपने देशों में परमाणु हथियारों का इस्तेमाल भंडारण न करने का निर्णय लिया है।

पर अधिकतम जनसंख्या एक लंबे न्यूक्लियर विंटर (जाड़े) के चपेट में आ जायेगा। ये सारे परमाणु बम इतनी धूल मिट्टी का गुबार हवा में बिखेरेंगे। कई हफ़्तों/महीनों तक सूर्योदय ही मुश्किल हो जाएगा। इस कारण धरती का तापमान कम हो जाएगा। न्यूक्लियर विंटर से बचना होगा।

अब ऐसे वातावरण में जीवन तो संभव है ही नही। जो भी मनुष्य कहीं बचेंगे वो भी समाप्त हो जाएंगे रेडियशन, कैंसर, खाने की क़िल्लत आदि से। न वनस्पति बचेगी ना पशु।

थाली पीटने की ज़रूरत नही पड़ेगी। कोरोना वायरस सहित विश्व की एक बड़ी जनसंख्या खुद ब खुद खत्म हो जाएगी।
पर आप यदि किसी तरह बच गए तो नॉर्वे के स्वालबार्ड सीड वॉल्ट तक पहुंचने की कोशिश कीजिए। हमने मतलब मानव जाति ने इसी दिन के लिए स्वालबार्ड सीड वॉल्ट बनाया है। इन बीजों से शायद आप धरती को फिर से बचा पाए। नई फसलें उगा पाएं। हो सकता है यहाँ कुछ वैज्ञानिक आपकी मदद करें। आप खेती बाड़ी करना भी सीख लीजिये काम आयेगा।