उसके एक रात पहले, उन्होंने अपनी वसीयत लिखी थी। इसमें उन्होंने अपने बीमा आदि से प्राप्त राशि को भाइयों के परिवार में बाँट देने की इच्छा प्रगट की थी। इससे भी महत्वपूर्ण यह है कि उन्होंने अपनी राख को सिंधु नदी में प्रवाहित करने की बात कही थी, जब सिंधु नदी पुनः भारत में बहने लगे। उनकी यह इच्छा पूरी नहीं की जा सकी है। उनका अस्थि-कलश पुणे के एक भवन में, उस दिन के लिए सुरक्षित है, जब उनका अखंड भारत का सपना पूरा होगा। - AcchiNews.com अच्छी न्यूज़ डॉट कॉम

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उसके एक रात पहले, उन्होंने अपनी वसीयत लिखी थी। इसमें उन्होंने अपने बीमा आदि से प्राप्त राशि को भाइयों के परिवार में बाँट देने की इच्छा प्रगट की थी। इससे भी महत्वपूर्ण यह है कि उन्होंने अपनी राख को सिंधु नदी में प्रवाहित करने की बात कही थी, जब सिंधु नदी पुनः भारत में बहने लगे। उनकी यह इच्छा पूरी नहीं की जा सकी है। उनका अस्थि-कलश पुणे के एक भवन में, उस दिन के लिए सुरक्षित है, जब उनका अखंड भारत का सपना पूरा होगा।

जिस उम्मीद पर हम और आप बैठे थे कि 15 अप्रैल के बाद सबकुछ ठीक हो जाएगा और ट्रेनों का परिचालन शुरू होगा। ऐसा बिलकुल नहीं है।
जी हां... सोशल मीडिया पर आग की तरह फैली ऐसी खबर को मोदी सरकार ने गलत करार दिया। रेलवे के वरिष्ठ अधिकारियों ने इसका खडंन करते हुए कहा है कि कोई भी नए आदेश जारी नहीं किए है।
भारतीय रेलवे की ऑफिशियल वेबसाइट पर फ्लैश हुए मैसेज ने सारी सच्‍चाई सामने रख दी। मैसेज भी स्‍पष्‍ट कहा गया है कि रेल सेवाओं को बहाल करने पर अभी तक कोई प्लान नहीं किया है, अभी इसका परिचालन नहीं, इस पर फैसला बाद में किया जाएगा।
तो इसका मतलब क्या साफ है कि देश में लगातार बढ़ते कोरोना के मरीजों को देखते हुए सरकार फिलहाल कुछ भी सुविधा खोलने के मूड में नहीं है। आपको क्या लगता है ये सही कदम है या नहीं, कमेंट में जवाब दे।