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हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन को खतरा बताने वाले रिसर्चर्स का यू-टर्न, वापस ली स्टडी

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कोवि़ड -19 के उपचार में इस्तेमाल की जाने वाली मलेरिया रोधी दवा हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन ने पूरी दुनिया में खलबली मचा दी है। कुछ ने इस दवा के उपयोग को खतरे के रूप में वर्णित किया, जबकि किसी ने इसे कोरोना से लड़ने में प्रभावी बताया। लेकिन अब शोधकर्ताओं जिन्होंने दावा किया था कि यह दवा एक खतरा है और उनके दावे को वापस ले लिया है। विज्ञान पत्रिका लैंसेट में अपना अध्ययन प्रकाशित करने वाले चार में से तीन शोधकर्ताओं ने गुरुवार को यह घोषणा की। उन सभी ने इस दवा के बारे में एक बड़ा अध्ययन किया था और कहा था कि यह दवा कोविद -19 के इलाज में मदद नहीं करेगी।

इन चार शोधकर्ताओं ने कहा था कि हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन से अस्पताल में मरीज की मौत का खतरा बढ़ जाता है। इन शोधकर्ताओं ने एक स्वास्थ्य कंपनी को अपना अध्ययन वापस लेने का कारण बताया है। इस शोध में, 96 हजार रोगियों के रिकॉर्ड का विश्लेषण किया गया, जिसमें पाया गया कि अधिक क्लोरोक्वीन का उपयोग कोरोना के खिलाफ मदद नहीं करता है। इस मलेरिया रोधी दवा से दिल की अतालता की स्थिति होने की संभावना बढ़ जाती है, जिसके कारण रोगी अस्पताल में ही मर सकता है।

अब शोधकर्ताओं द्वारा यह कहा गया है कि ऐसी स्थिति में प्राथमिक शोध में उन्हें जो डेटा स्रोत मिला है, उसकी पुष्टि नहीं की जा सकती है। ऐसे में शोधकर्ता इस अध्ययन को वापस ले रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि महामारी में सच्ची मदद के लिए उन्होंने यह शोध किया था, लेकिन वह इसमें विफल रहे हैं, इसलिए वे माफी मांगते हैं।

इस शोध के सामने आने के बाद, विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने इस दवा के नैदानिक ​​परीक्षणों पर प्रतिबंध लगा दिया था, लेकिन इसके बाद वैज्ञानिकों के बीच यह चिंता बढ़ गई थी कि कई देश और अस्पताल कोरोना वायरस पर सही हैं या पूरी तरह से जानकारी नहीं दे रहे हैं।