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बिना कृषि उद्यम के असंभव दो गुनी आय!

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विनोद मिश्रा
बांदा।
उत्तर प्रदेश के बांदा सहित बुंदेलखंड में 70 फीसदी खेती के बीच मात्र डेढ़ प्रतिशत कृषि कारोबार हैं। गैर कृषि उद्यम इससे कई गुना ज्यादा हैं। ऐसे में किसानों की आय दोगुनी के दावे यहां पर बेमानी साबित हो रहे हैं। सातों जनपदों में लगभग 15 लाख किसान खेती से जुड़े हुए हैं, लेकिन कृषि उद्यम मात्र 23,683 है। किसानों का कहना है कि खेती से जुड़े छोटे, मध्यम और बड़े उद्योग स्थापित करने से ही बुंदेलखंड की बदहाली दूर होगी। किसानों की आय दोगुना करने के वादे भी पूरे होंगे।



बुंदेलखंड में दशकों से बेरोजगारी के साथ पलायन भी काफी संख्या में है। केंद्र सरकार के साथ ही प्रदेश की सरकारें भी यहां की बदहाली को खत्म करने के लिए भारी भरकम पैकेज देती आईं हैं, लेकिन फिर भी बेरोजगारी और पलायन की समस्या खत्म होने का नाम ही नहीं ले रही है। किसानों की बदहाली भी किसी से छिपी नहीं है। किसानों की बदहाली खत्म करने को सरकारें काफी प्रयास तो कर रही हैं, लेकिन फिर भी स्तर में कोई खास अंतर देखने को नहीं मिल रहा है। 

यहां खेती का रकबा भले ही कागजी आंकड़ों की बाजीगरी के लिए पर्याप्त हो, मगर रकबे के साथ पैदावार और मैदान के किसानों की खेती के रकबे व पैदावार में भी जमीन-आसमान का अंतर होता है। सबसे बड़ी बात यहां यह है कि बुंदेलखंड क्षेत्र उद्योगों से भी अछूता है। कृषि ही यहां मुख्य आय का स्रोत है। इस परिस्थिति के बाद भी यहां कृषि संबंधी कारोबार पर तवज्जो नहीं दी जा रही। किसान महज फसल पैदा करके उसे सरकारी केंद्र या बाजार में बेचने तक सीमित होकर रह गया है।



किसानों के साथ ही विशेषज्ञों का मानना है कि कृषि उपज को उद्यम में बदला जाए तो लागत से कई गुना अधिक आमदनी सुनिश्चित है। सरकार के अर्थ एवं संख्या विभाग के ताजे आंकड़ों से यह खुलासा हुआ कि बुंदेलखंड में कृषि उद्यम बेहद कम हैं। सातों जनपदों में इनकी संख्या मात्र 23,683 है, जबकि गैर कृषि उद्यम 2,16,475 है। सबसे कम कृषि उद्यम चित्रकूट जिले में हैं। 
यहां मात्र 63 कृषि उद्यम हैं, जबकि गैर कृषि उद्यम 15,083 हैं। जालौन की स्थिति कुछ बेहतर है। यहां कृषि उद्यमों की संख्या 16,056 हैं, जबकि गैर कृषि उद्यम 45,767 हैं। अर्थ एवं संख्या विभाग के आंकड़ों के अनुसार, बुंदेलखंड में 62 किसानों के बीच मात्र एक कृषि उद्यम है। सातों जनपदों में 14,87,000 से ज्यादा किसान हैं, जबकि कृषि उद्यम सिर्फ 23,683 हैं। बुंदेलखंड में कुल कृषि क्षेत्र 29 लाख 61 हजार 692 हेक्टेयर है। इसमें लगभग 70 फीसदी क्षेत्रफल में बुवाई होती है। 

किसानों की संख्या के अनुपात में कृषि उद्यम बांदा में 52, चित्रकूट में 65, हमीरपुर 50, महोबा 38, जालौन में 27और झांसीमें 33 ललितपुर 48 है़ । 

किसानों की कायाकल्प के लिए उद्यम जरूरी

बुंदेलखंड के किसानों की दशा बदलने के लिए जरूरी है कि यहां छोटे और मध्यम श्रेणी के उद्यम लगाए जाएं। कृषि आधारित व्यवसायों में मशरूम उद्योग, रेशम उद्योग, मधुमक्खी पालन, मशरूम उद्योग, अचार, मुरब्बा और दलिया उद्योग, आटा चक्की, सरसों के तेल का स्पेलर, दूध डेयरी आदि शामिल हैं। बुंदेलखंड में इन सभी की पर्याप्त खेती होती है।

बुंदेलखंड की प्रमुख फसलें

खरीफ की फसल- ज्वार, बाजरा, अरहर आदि। रबी की फसल- चना, गेहूं, मटर, मसूर, अलसी, सरसों आदि। जायद की फसल- यह यहां कम मात्रा में है। मूंग आदि शामिल है।

बुंदेलखंड में माहौल नहीं, नीतियां दोषी

बुंदेलखंड में उद्यम या उद्योग का माहौल नहीं है। इसके पीछे सरकार की नीतियां ही दोषी हैं। केंद्र और राज्य सरकारें बड़े उद्योगों को बढ़ावा देती हैं, जबकि छोटे उद्योगों को नजरंदाज करती हैं। कोई छोटा उद्यमी शुरुआत करना चाहे तो सरकार के नियम-कानून आड़े आ जाते हैं। बुंदेलखंड को उद्यम से सरसब्ज करने के लिए जरूरी है कि यहां के किसानों को उद्यम स्थापना में ज्यादा से ज्यादा छूट और रियायतें दी जाएं।