संकट में ग्रामीणों की ढाल बनी आशा दीदी! - AcchiNews.com अच्छी न्यूज़ डॉट कॉम

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संकट में ग्रामीणों की ढाल बनी आशा दीदी!

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विनोद मिश्रा

बांदा। 'कोरोना वायरस के संक्रमण की चिंता तो है। आने-जाने में मुश्किल भी हो रही है। पर हम काम करना बंद नहीं कर सकते। क्योंकि इस समय अपना फ़र्ज़ निभाना और लोगों की जान बचाना ज़रूरी है।' यह कहना है नरैनी ब्लाक के गोलेपुर कालिंजर गाँव की आशा कार्यकर्ता गीता का। गीता बांदा जिले की उन आशा कार्यकर्ताओं में एक हैं जो वायरस के खतरे और चढ़ते पारे के बीच भी पूरे जोश से प्रवासियों की जानकारी लेने और लोगों को कोरोना के प्रति जागरुक करने में जुटी हैं।  

गीता बताती हैं- वर्ष 2016 से आशा कार्यकर्ता के पद पर काम रही हूँ। आम दिनों में गाँव-गाँव जाकर लोगों के हाल-चाल लिया करती थी। गर्भवतियों की देखरेख, नवजात की देखभाल, लोगों को परिवार नियोजन सम्बन्धी परामर्श देने के साथ-साथ उन्हें सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं की जानकरी देती थी। आम दिनों की अपेक्षा अब समय मुश्किल भरा है। कोरोना का संक्रमण गाँव में न फैले इसके लिए बाहर से आए प्रवासियों की जानकारी इकट्ठा करनी होती है। उसके क्षेत्र में अब तक 70-75 प्रवासी आए हैं। कोरोना के प्रति जागरुक कर लोगों को अनावश्यक बाहर न जाने, मास्क पहनने और हाथ धोने के तरीके  बताती हूँ। इसके अलावा सुरक्षित प्रसव और टीकाकरण का लाभ दिलाने का भी पूरा प्रयास रहता है। पहले और कोरोना काल में  फर्क इतना है कि अब लोगों के घर के अन्दर नहीं जाती। कोरोना संक्रमण के चलते बाहर से ही जानकारी देकर चली आती हूँ। 

गीता की तरह जिले की तमाम आशा कार्यकर्ता आज कोरोना महामारी के खिलाफ जंग में सरकार के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ी हैं। मुख्य चिकित्सा अधिकारी डा. संतोष कुमार का कहना है- कोरोना महामारी के बढ़ते मरीजों के साथ-साथ सामुदायिक स्तर पर निगरानी को बढ़ाया जा रहा है ताकि संभावित या संक्रमित मरीजों का पता लगाकर उन्हें तुरंत क्वारंटाइन किया जाए। आशा कार्यकर्ता इसमें बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। वह प्रवासियों की निगरानी के लिए गठित ग्राम एवं शहरी निगरानी समितियों की सदस्य के रूप में बाहर से आने वालों और होम क्वारंटाइन किये गए लोगों पर भी नज़र रख रही हैं। आशा कार्यकर्ताओं के बिना समुदाय में काम करना मुमकिन नहीं है।

जिला कार्यक्रम प्रबंधक कुशल यादव ने बताया कि कोरोना को हराने में जागरुकता सबसे बड़ा हथियार है और आशा कार्यकर्ता इसमें विशेष रूप से सहयोग कर रही हैं। वर्तमान में जनपद में 1441 आशा कार्यकर्ताओं की पैदल फ़ौज काम कर रही है। कोविड-19 को लेकर इन सभी को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर तथा ऑनलाइन प्रशिक्षण दिया गया है । व्यक्तिगत सुरक्षा के लिए इन्हें मास्क और सैनीटाइज़र भी दिया गया है।